गुरुवार, 9 जनवरी 2020

मन भीतर यही आस पले



मन भीतर यही आस पले,  
प्रणय की आँधी चले, 
  थार के दिनमान जगे,   
मन संलग्नता से,  
विधि का आह्वान करे,  
अनल का प्रकोप रुठे,  
प्रकृति ज़िंदा न जले,  
सघन वन पर नीर बहा, 
गगन हरी देह धरा की करे। 

धूल भरी घनी काँटों से सनी, 
 गहरी शाब्दिक चोट,  
वेदना की टीसों के स्थान, 
तन्मयता से परस्पर, 
उनींदे प्रेम के निश्छल,  
पुरवाई के झोंकों से भरे।  

तुषार-सी शीतल निर्मल, 
वाक-शक्ति मरुस्थल की,  
ऊँघती संध्या-लालिमा-सी, 
अधमींची आँखों पर ठहरे, 
क्षुद्रता का अभिशाप हर, 
पलकों का बन सुन्दर स्वप्न,  
नन्हीं झपकी की गठरी बने, 
जीवन जीव का फूलों-सा, 
हृदय सरिता-सा झरे। 

©अनीता सैनी 


22 टिप्‍पणियां:

  1. पलकों का बन सुन्दर स्वप्न,
    नन्हीं झपकी की गठरी बने,
    जीवन जीव का फूलों-सा,
    हृदय सरिता-सा झरे |
    बेहतरीन और लाजवाब सृजन 👌👌

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    1. सादर आभार आदरणीया मीना दीदी जी सुन्दर समीक्षा हेतु.
      सादर

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  2. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (10-01-2019 ) को "विश्व हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक - 3576) पर भी होगी

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का

    महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है 
    अनीता लागुरी "अनु"

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    1. सस्नेह आभार प्रिय अनु मेरी रचना का मान बढ़ाने हेतु.
      सादर

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  3. बहुत सुंदर रचना,अनिता दी।

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    1. सादर आभार आदरणीया ज्योति बहन उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु
      सादर

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  4. बहुत खूब... ,लाज़बाब सृजन सखी

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    1. सादर आभार आदरणीया कामिनी दीदी जी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
      सादर

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  5. बेहतरीन रचना सखी 👌

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    1. सादर आभार आदरणीया अनुराधा दीदी जी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
      सादर

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  6. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    १३ जनवरी २०२० के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया प्रिय श्वेता दी मेरी रचना को स्थान देने के लिये.
      सादर

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  7. बेहद खूबसूरत सृजन सखी।सादर नमन।

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  8. शुभप्रभात, चोट जैसी नकारात्मक विषय पर भी आपने विस्मयकारी रचना लिख डाली हैं । मेरी कामना है कि यह प्रस्फुटन बनी रहे और हमारी हिन्दी दिनानुदिन समृद्ध होती रहे। हलचल के मंच को नमन करते हुए आपका भी अभिनंदन करता हूँ ।

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    1. सादर आभार आदरणीय सुन्दर समीक्षा हेतु.
      सादर

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  9. वाह!प्रिय सखी ,बेहतरीन भावाभिव्यक्ति ।

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    1. सस्नेह आभार आदरणीया दीदी जी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
      सादर

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anitasaini.poetry@gmail.com