शनिवार, 21 मार्च 2020

दुर्लभ साँसें



धड़कन है जो धड़कती रहती है,
संग  साँसें भी चलतीं रहतीं हैं, 
थामें दिल का हाथ, हाथों में,
आँखें भी हँसती-रोतीं रहती हैं। 

सृष्टि में बिखरीं हैं अनंत अविरल साँसें,
धरती-जल-अंबर के आनन पर देखो,
कहीं लहरायी बल्लरियों-सी कहीं, 
अनुभूति में उलझी टूटे तारों-सी साँसें। 

वेंटिलेटर पर संघर्ष करतीं देखीं, 
जीवनदायिनी गणित साँसें, 
जीवन का अर्थ बतातीं समझाती, 
संसार की असारता का करतीं हैं,
बखान दुर्लभ साँसें। 

©अनीता सैनी 

16 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर सृजन।

मन की वीणा ने कहा…

साँसों का सही चित्रण।
सुंदर भाव पूर्ण सृजन।
सृष्टि में बिखरीं हैं अनंत अविरल साँसें,सटीक ।
बहुत सुंदर रचना साँस तक उतरती।

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर

SUJATA PRIYE ने कहा…

बहुत सुंदर शब्द चित्रण सखी।सुंदर और सार्थक रचना।

शुभा ने कहा…

वाह!प्रिय सखी ,बहुत सुंदर !

Kamini Sinha ने कहा…

वेंटिलेटर पर संघर्ष करतीं देखीं,
जीवनदायिनी गणित साँसें,

बहुत खूब... ,सुंदर अभिव्यक्ति अनीता जी ,सादर स्नेह

Sudha devrani ने कहा…

वेंटिलेटर पर संघर्ष करतीं देखीं,
जीवनदायिनी गणित साँसें,
जीवन का अर्थ बतातीं समझाती,
संसार की असारता का करतीं हैं,
बखान दुर्लभ साँसें।
सही कहा संसार असार ही तो होता है अंतिम साँसों के साथ....
बहुत सुन्दर सार्थक सृजन
वाह!!!

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार बहना सुंदर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया सुधा दीदी सुंदर उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर सृजन

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी
सादर