रविवार, 22 मार्च 2020

गूँथे तारिका नित सुंदर स्वप्न


गूँथे तारिका नित सुंदर स्वप्न, 
प्रीत अवनी पर है अवदात ।
कज्जल कुँज में झूलता जीवन,  
समय सागर की है  सौगात।। 

 लहराती है नभ में पहन दुकूल ,
शीतल बयार संग प्रीत पली ।
उमड़ी धरा पर सुधी मानव की ,
खिला नव-अँकुर धरणी चली ।

छिपे तम में  मन के सुंदर भाव 
चाहता है एकाकी बरसात ।
गूँथे तारिका नित सुंदर स्वप्न, 
प्रीत अवनी पर है अवदात ।

करुणामयी  अनुराग हृदय भरा ,
पूनम  चाँदनी मधुर पराग झरा ।
अनंत अंबर खोजे चित्त चैन, 
झरते तारे का प्रतिबिंब ठहरा ।

समय सागर पर ठिठुरी छाया, 
जीवन प्रलय है झँझावत ।
गूँथे तारिका नित सुंदर स्वप्न, 
प्रीत अवनी पर है अवदात ।

© अनीता सैनी 

10 टिप्‍पणियां:

Nitish Tiwary ने कहा…

शुद्ध हिंदी की बहुत सुंदर कविता।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (23-03-2020) को    "घोर संक्रमित काल"   ( चर्चा अंक -3649)      पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
आप अपने घर में रहें। शासन के निर्देशों का पालन करें।हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय चर्चामंच पर मेरी रचना को स्थान देने हेतु.

Onkar ने कहा…

सुंदर रचना

मन की वीणा ने कहा…

गीत की लय पर सुंदर छायावादी लेखन ।
भाव शब्द दोनों बहुत सुंदर।

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

बेहतरीन रचना बहना

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी
सादर