बुधवार, 25 मार्च 2020

साँसें पूछ रहीं हाल प्रिये

मूरत मन की  पूछ रही है, 
नयनों से लख-लख प्रश्न प्रिये,
 जीवन तुझपर वार दिया है,
साँसें पूछ रहीं हाल प्रिये। 

समय निगोड़ा हार न माने,
पुरवाई उड़ती उलझन में,
पल-पल पूछूँ हाल उसे मैं,
नटखट उलझाता रुनझुन में
कुशल संदेश पात पर लिख दो,
चंचल चित्त अति व्याकुल प्रिये।। 

भाव रिक्त कहता मन जोगी,  
नितांत शून्य आंसू शृंगार,
भाव की माला गूँथे स्वप्न,
चेतन में बिखरे बारबार,
अवचेतन सँग गूँथ रहीं हूँ, 
कैसा जीवन जंजाल प्रिये।।

सीमाहीन क्षितिज-सी साँसें,
तिनका-तिनका सौंप रही हूँ,
आकुल उड़ान चाह मिलन की,
भाव-शृंखला भूल रही हूँ,
सुध बुद्ध भूली प्रिय राधिका, 
कैसी समय की ये चाल प्रिये।।

© अनीता सैनी

22 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर और भावप्रवण गीत।

मुकेश सैनी ने कहा…

बहुत खूब

Anuradha chauhan ने कहा…

वाह बेहद खूबसूरत रचना सखी

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26.3.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3652 में दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी

धन्यवाद

दिलबागसिंह विर्क

Meena Bhardwaj ने कहा…

बेहतरीन सृजन 👌👌 आप हर विषय पर लिखने में सिद्धहस्त हैंं
कोमलकांत भावों की लाजवाब अभिव्यक्ति ।

रेणु ने कहा…

भाव रिक्त कहता मन जोगी,
नितांत शून्य आंसू शृंगार,
भाव की माला गूँथे स्वप्न,
चेतन में बिखरे बारबार,
अवचेतन सँग गूँथ रहीं हूँ,
कैसा जीवन जंजाल प्रिये।।
बहुत खूब प्रिय अनिता| लेखन में निरंतर धार और भावों की प्रगाढता से संवरी रचना बहुत प्यारी है |ये प्रवाह यूँ ही चलता रहे |नव संवत्सर और दुर्गा नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएं| सस्नेह

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

भाव रिक्त कहता मन जोगी,
नितांत शून्य आंसू शृंगार,
भाव की माला गूँथे स्वप्न,
चेतन में बिखरे बारबार,
अवचेतन सँग गूँथ रहीं हूँ,
कैसा जीवन जंजाल प्रिये।।



आहा ! बहुत सुखद अनुभूति देने वाली रचना
भाषा शैली। .शब्दों का श्रृंगार सब। ..बस आँखों से दिल तक सकूं भरती रचना

Sudha devrani ने कहा…

समय निगोड़ा हार न माने,
पुरवाई उड़ती उलझन में,
पल-पल पूछूँ हाल उसे मैं,
नटखट उलझाता रुनझुन में
कुशल संदेश पात पर लिख दो,
चंचल चित्त अति व्याकुल प्रिये।।
इतनी विषम परिस्थितियों में दूर रहते प्रियजनों के लिए मन व्याकुल होना लाजिमी है...
मन के भावों को इतने सुन्दर रूप में नवगीत में सजा लेना कोई आपसे सीखे...
वाह!!!
बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर

मन की वीणा ने कहा…

अभिनव सुंदर अहसास समेटे सुंदर सृजन।

उर्मिला सिंह ने कहा…

कोमल अहसास दर्शाती मन को छूती अति सुन्दर रचना

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया जी

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर चर्चामंच पर मेरी रचना को स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर सारगर्भित समीक्षा हेतु. स्नेह आशीर्वाद बनाये रखे.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार बहना सुंदर समीक्षा हेतु. स्नेह आशीर्वाद बनाये रखे.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी सारगर्भित समीक्षा हेतु.
स्नेह आशीर्वाद बनाये रखे.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.
स्नेह आशीर्वाद बनाये रखे.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर सारगर्भित समीक्षा हेतु.
स्नेह आशीर्वाद बनाये रखे.
सादर