गुरुवार, 11 जून 2020

रण है जीवन


व्योम से बरसती धूप देखकर 
बादल का टुकड़ा दौड़कर आ गया। 
कब जागेगा सोया मानस? 
धरा की परतें पिघलीं पानी सोख गया।  

मुग्ध मलयज के झोंकें 
लेप चंदन का हृदय को भा गया। 
सुख-समृद्धि की पनपती इच्छा  
नीम के बौर-सी मिठास भा गयी। 

जीवन-रण चेत उठी सूखी लहू की धार 
सुन सूखे पत्तों-सी दूरन्त मद्धिम पुकार। 
हिलोरें भरती स्मृतियाँ दिगंत पर बैठीं  
टेसुओं संग मधुदूत निज गीत गा गया। 

बिखरे भाव बीधता हिमालय पर्वत 
सीने के अनगिनत घाव छिपा गया। 
प्रीत  की मनसा बाँधे पैरों से पाहन 
श्वेत बिस्तर हिम का भा गया।

©अनीता सैनी 'दीप्ति'

28 टिप्‍पणियां:

Meena Bhardwaj ने कहा…

सादर नमस्कार,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार
(12-06-2020) को
"सँभल सँभल के’ बहुत पाँव धर रहा हूँ मैं" (चर्चा अंक-3730)
पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है ।

"मीना भारद्वाज"

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 11 जून जून 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

दिगंबर नासवा ने कहा…

जीवन संघर्ष ऐसा हो होता है ... पल पल बदलती अवस्था को को पार पर संघर्ष से ही किया जा सकता है ...\
गहरे भाव से बुनी रचना है ...

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचा का सृजन हुआ है । हार्दिक बधाई अनीता जी।

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन रचना सखी

Akhilesh shukla ने कहा…

बिखरे भाव बेंधता हिमालय पर्वत
सीने के अनगिनत घाव छिपा गया।
प्रीत की मनसा बाँधे पैरों से पाहन
श्वेत बिस्तर हिम का भा गया।
सहज, सरल एवं सरस भाषा में एक सारगर्भित सार्थक सृजन । अतीव सुन्दर । दीदी ।

hindiguru ने कहा…

नीम के बोर सी मिठास ..बहुत बढ़िया उपमा हे

ANIL DABRAL ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति।

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय मीना दीदी चर्चामंच पर स्थान देने हेतु .
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय यशोदा दीदी मंच पर स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाती सुंदर प्रतिक्रिया हेतु .
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय पुरुषोत्तम सर उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय अनुराधा दीदी मनोबल बढ़ाने हेतु .
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभारी हुँ अनुज अखिलेश आपकी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु बहुत बहुत शुक्रिया .
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु .
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार अनुज सुंदर प्रतिक्रिया हेतु .
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु .
सादर

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

नए कलेवर की कविता . शब्द और भाव सुन्दर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय गिरिजा दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु .आशीर्वाद बनाए रखे .
सादर

शुभा ने कहा…

गहरे भाव समेटे ,सुंदर सृजन प्रिय अनीता ।

Sudha devrani ने कहा…

हिलोरें भरती स्मृतियाँ दिगंत पर बैठीं
टेसुओं संग मधुदूत निज गीत गा गया।
बहुत सुन्दर...
बिखरे भाव बेंधता हिमालय पर्वत
सीने के अनगिनत घाव छिपा गया।
प्रीत की मनसा बाँधे पैरों से पाहन
श्वेत बिस्तर हिम का भा गया।
गहन चिन्तनीय... सार्थक सृजन।

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

"जीवन-रण चेत उठी सूखी लहू की धार
सुन सूखे पत्तों-सी दूरन्त मद्धिम पुकार।
हिलोरें भरती स्मृतियाँ दिगंत पर बैठीं
टेसुओं संग मधुदूत निज गीत गा गया।"

रचना में मौलिकता उसका सौंदर्य कई गुना बढ़ा देती है।
अनूठे बिम्बों और प्रतीकों से सजी मनमोहक अभिव्यक्ति जो सुधी पाठकों के अंतस को छूने में सक्षम है।
ऐसी रचनाएँ पाठकों का एक वर्ग तैयार करतीं हैं जो शब्द, संवेदना और भाव में नए-नए अर्थ तलाशने में रूचि रखते हैं।


अनीता सैनी ने कहा…

आभारी हुँ आदरणीय सुभा दीदी आपकी मनोबल बढ़ाने हेतु सादर आभार .

अनीता सैनी ने कहा…

आभारी हुँ आदरणीय सुधा दीदी आपकी मनोबल बढ़ाने हेतु तहे दिल से आभार .आशीर्वाद बनाए रखे .
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभारी हुँ आदरणीय रविन्द्र जी सर आपकी हमेशा ही आपकी प्रतिक्रिया मेरा मनोबल बढ़ाती है आशीर्वाद बनाए रखे .
सादर

Jyoti Singh ने कहा…


बिखरे भाव बीधता हिमालय पर्वत
सीने के अनगिनत घाव छिपा गया।
प्रीत की मनसा बाँधे पैरों से पाहन
श्वेत बिस्तर हिम का भा गया
अति उत्तम

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया ज्योति दीदी.आपका आशीर्वाद सदैव मेरे साथ रहें.यही कामना है
सादर