जीवन का हस्ताक्षर
✍️ अनीता सैनी
….
बहुत सुंदर संयोग है,
या कहूँ
अर्थ से भरी हुई नियति।
पीछे पलट कर
न देखने की चाह के बावजूद
समय
ख़ुद पलट कर
सामने आ खड़ा होता है।
ठीक उसी तारीख़ के साथ।
7 फ़रवरी, शनिवार
वह दिन
जब किसी नन्ही उँगली ने
मेरी उँगली थामी थी।
और दो दशक बाद
ठीक उसी शनिवार
7 फ़रवरी को
‘खरोंच’
मेरे जीवन में
प्रवेश करती है।
होनी कहती है-
यह कोई
सुंदर संयोग नहीं
जीवन का
अपना हस्ताक्षर है।
पर आप मुझे शुभकामनाएँ कह सकते हैं।
बच्चों को खूब आशीर्वाद 💐

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