सोमवार, 28 जनवरी 2019

साँझ




                                      धरा  आलिंगन  में, 
                                    धरी  सुनहरी  साँझ,
                                   धूसर  रंगों   में  डूबी, 
                                   ग़ुरुर  से  माथा  चूम |

                                  शांत  लय  से  रखती, 
                                        पद-चाप, 
                                    प्रीत  में   इतराती, 
                                  करती  प्रेमालाप |

                                    समीर शांत  लय, 
                                        से टकराती, 
                                     प्रीत में बरसाती, 
                                         सुनहरी धूप |

                               मद्धिम  लय  में  छिपी, 
                                     आकांक्षा, 
                             दुल्हन-सा  माधुर्य  समेटे,  
                             श्यामलता में सिमटी,  
                            करती  रंगों  की  बौछार |

                                  बेचैनी हृदय  में समेटे, 
                                 जला   प्रीत  का  दीप, 
                                 ओढ़ी  चुनरी  यौवन की, 
                                'पी'  मिलन  की  आस |
                              
                                       -  अनीता 

33 टिप्‍पणियां:

रवीन्द्र भारद्वाज ने कहा…

बहुत ही सुंदर....
साँझ का वर्णन

शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 28/01/2019 की बुलेटिन, " १२० वीं जयंती पर फ़ील्ड मार्शल करिअप्पा को ब्लॉग बुलेटिन का सलाम “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

लोकेश नदीश ने कहा…

क्या बात है
बहुत बहुत खूब

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

मद्धिम लय में छिपी
आकांक्षा,
दुल्हन सा माधुर्य समेटे
श्यामलता में सिमटी
करती रंगों की बौछार,...
बहुत-बहुत सुन्दर लिखा है आपने। प्रकृति की माधुर्य का सजीव चित्रण। बेहतरीन ।

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय शिवम् जी ब्लॉग बुलेटिन में स्थान देने हेतु
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय लोकेश जी - सह्रदय आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय पुरुषोत्तम जी - रचना की सराहना हेतु आप का तहे दिल से आभार
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन रचना सखी

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (30-01-2019) को "वक्त की गति" (चर्चा अंक-3232) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Pammi singh'tripti' ने कहा…


आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 30 जनवरी 2019 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!


अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय चर्चा में मुझे स्थान देने के लिए |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीया पम्मी जी पांच लिंकों का आनन्द में मुझे स्थान देने के लिए |
सादर

Sweta sinha ने कहा…

वाहह.. बहुत सुंदर सृजन👌

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीया श्वेता जी -आप का तहे दिल से आभार
सादर

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बहुत बढ़िया, अनिता दी।

अनीता सैनी ने कहा…

शुक्रिया ज्योति बहन . . ..
आप को बहुत सा स्नेह |
सादर

Meena Bhardwaj ने कहा…

सांझ का मनोरम वर्णन । अत्यंत सुन्दर रचना ।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीय मीना जी
सादर

व्याकुल पथिक ने कहा…

सुंदर शब्द चित्र, प्रणाम

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत खूब ........ स्नेह सखी

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय कामिनी जी - शुक्रिया सखी ...
आभार
सादर

मन की वीणा ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर सखी ।
अप्रतिम रचना।

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी कुसुम जी - आप का तहे दिल से आभार, मार्गदर्शन कर आप ने रचना को सम्मान दिया, बहुत सा सस्नेह आप को |
आभार
सादर

Sudha devrani ने कहा…

उत्कृष्ट सृजन...
वाह!!!

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सुधा जी - सस्नेह आभार आप का
सादर

deepshikhaaj ने कहा…

बहुत प्यारी रचना सखी...

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

मुकेश ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना

Neeraj Khandal ने कहा…

बहुत सुंदर रचना । हिंदी भाषा के सभी ब्लॉगर्स अपने ब्लॉग को मोनेटाइज करके उससे धनार्जन करना सीखें ।

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आप का
सादर