शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

यादों के निशां






             वक़्त की दरियादिली, यादों की आहट छोड़ गया 
          दम तोड़ती मुस्कुराहट, इंतज़ार के  पन्ने  छोड़  गया |

          ज़हन में दफ़्न यादें,साँसों  की   गर्माहट   छोड़   गया 
          कुछ दरीचे में दफ़न, कुछ बिस्तर की सलवटों  में छोड़ गया  |

           पुकारती   आँखें,  कँगन    की  झँकार  छोड़  गया 
          यादों  की  गठरी, बिस्तर  के  सिरहाने  छोड़ गया 

             क़दमों  के  निशां,  तड़पती   परछाई   छोड़  गया
         अनगिनत   यादें,  आँगन  की   दहलीज़ पर  छोड़  गया |

            मुस्कुराती  मोहब्बत, सिसकती   यादें  छोड़  गया
           आँख  का  पानी,  बीतें  लम्हों की सौगत छोड़ गया |

           ज़िंदगी  की  कहानी,  कुछ  लम्हों  में  समेट  गया 
          यादों  की  परछाई, पलकों पर सजा  गया |

           उदास    शाम,   यादों   भरा   दामन  छोड़  गया 
         उम्मीद की अँगुली, वक़्त के बोलते ज़ख़्म  छोड़ गया |

                                   -  अनीता 

26 टिप्‍पणियां:

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

मुस्कुराती मोहब्बत, सिसकती यादें छोड़ गया,
आँख का पानी, बीतें लम्हों की सौगात छोड़ गया,

जिंदगी की कहानी, कुछ लम्हों में समेट गया ,
यादों की परछाई, धड़कनों की सलवटों में छोड़ गया ,

उदास शाम, यादों भरा दामन छोड़ गया ,
उम्मीद की अंगुली, वक़्त के बोलते जख़्म छोड़ गया |
बेहतरीन गजल लिखी है आपने । शब्द कम हैं तारीफ के लिए । अनन्त शुभकामनाएं आदरणीय अनीता जी।

रवीन्द्र भारद्वाज ने कहा…

बहुत खूब......... बेहतरीन रचना... आदरणीया।

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत - बहुत आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

विश्वमोहन ने कहा…

बहुत बढ़िया!!!

Sudha devrani ने कहा…


मुस्कुराती मोहब्बत, सिसकती यादें छोड़ गया,
आँख का पानी, बीतें लम्हों की सौगात छोड़ गया,
बेहद लाजवाब....
वाह!!!

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार सखी
सादर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (03-02-2019) को "चिराग़ों को जलाए रखना" (चर्चा अंक-3236) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय ....आशीर्वाद बनाये रखे |
आभार
सादर |

Meena Bhardwaj ने कहा…

वाह..., बहुत खूबसूरत भावपूर्ण रचना ।

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार सखी
सादर

जयन्ती प्रसाद शर्मा ने कहा…

बहुत सुन्दर।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
४ फरवरी २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय श्वेता जी पांच लिंकों का आनंद पर स्थान देने के लिए |
सादर

दिगंबर नासवा ने कहा…

विरह, उदासी और मन के गहरे एहसास को बाखूबी सहज ही उतारा है इन शेरों में ...
जाने वाले कितना कुछ छोड़ जाते हैं ...

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय दिगम्बर नस्वा जी आप को मेरी रचना पसंद आई, बहुत ख़ुशी हुई आप का साथ और आशीर्वाद बना रहे...
आप का ह्रदय तल से आभार
सादर

Sadhana Vaid ने कहा…

वाह अनीता जी ! बहुत ही खूबसूरत रचना ! मन के हर तार को छेड़ती हुई एक अकथनीय उदासी की दहलीज पर खड़ा कर गयी है आपकी यह प्रस्तुति ! बहुत सुन्दर !

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीया साधना जी बहुत अच्छा लगा आप ब्लॉग पर पधारे और रचना की सराहना की |
तहे दिल से आभार आप का |
सादर

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत सुंदर..... लाजबाब.... गजल एक एक शब्द दिल को छूटा हुआ ,सादर स्नेह सखी

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार कामिनी बहन आप की शुभकामनायें मिली ...ग़जल का लिखना सार्थक हुआ ...आप का साथ बना रहे |
आप को बहुत सा स्नेह |
सादर

व्याकुल पथिक ने कहा…

दम तोड़ती मुस्कुराहट, इंतज़ार के पन्नें छोड़ गया,
मार्मिक फिर भी मन को शांत कर गया।

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय ब्लॉग पर आप का तहे दिल से स्वागत |
रचना की सार्थकता के लिए सह्रदय आभार |
सादर