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रविवार, 10 फ़रवरी 2019

नज़र-नज़र का खेल


                                        
   ज़िंदगी  को  परखती   नज़र, नज़रिया  बन  गयी,  
   कहीं   चढ़ी  परवान, कहीं   धूल  में  मिला  गयी  |

   मुस्कुराती  नज़रें, दिल  में  वफ़ा  के फूल   खिला गयी  ,
    झुक  गयी   गर  वो  नज़रें , बेरुख़ी   का  सबब  बन  गयी|

     मासूम दिल की नज़रें,  कर  रही तग़ाफ़ुल  का  गिला, 
    मिली  इस  जहाँ की नज़रों  से,तड़पकर ख़ाक हो गयी |

     हुक़ुमत  दिल  पर  वो  राज -ए -उल्फ़त  छिपाए  रहे,
     डगमगा  गए  क़दम  ज़ब  नज़रों  से  बात  हो  गयी  |
        
  नज़रों पर चढ़ा  पैमाना दिल का,ज़िंदगी  का रुख़ बदल गया,   
 पत्थर पर बरसा रहे मुहब्बत,इंसानियत मुहब्बत को तरस गयी|

   कुछ स्वार्थ से क़दम मिलाती, कुछ अहम के परवान चढ़ गयी ,
    कुछ  संवार रही  धरा को, कुछ बंजर बना गयी|

   नज़र से उपजा नज़रिया, नज़रों  को ग़ुमराह कर गया ,
  एक नज़र तलाश रही अपने, एक अपनों को ठुकरा गयी|

                                    - अनीता सैनी 

36 टिप्‍पणियां:

  1. नज़रों पर चढ़ा पैमाना दिल का, जिंदगी का रुख़ बदल गया, पत्थर पर बरसा रहे महोब्बत, इंसानियत वफ़ा को तरस गई |


    वाह अति सुंदर।

    जवाब देंहटाएं
  2. नज़र से उपजा नजरिया, नज़रों को ग़ुमराह कर गया ,
    एक नज़र तलाश रही अपने, एक अपनों को ठुकरा गई |
    अति सुंदर....... सखी

    जवाब देंहटाएं
  3. नज़र से उपजा नजरिया, नज़रों को ग़ुमराह कर गया ,
    एक नज़र तलाश रही अपने, एक अपनों को ठुकरा गई |
    .
    उत्तम रचना मैम

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय अमित जी - ह्रदय तल से आभार आप का उत्साहवर्धन के लिए |
      सादर

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (11-02-2019) को "खेतों ने परिधान बसन्ती पहना है" (चर्चा अंक-3244) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    बसन्त पंचमी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  5. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    ११ फरवरी २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  6. बहुत ही सुन्दर नजर और नजरिया...
    लाजवाब..

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  7. नज़रों के अलग अंदाज़ को बाखूबी लिखा है ... नज़र से देखने की जरूरत है इसे ...

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    1. तहे दिल से आभार आदरणीय दिगम्बर जी |आप ने टिप्णी से रचना का गौरव बढ़ाया |
      आभार
      सादर

      हटाएं
  8. वाह बहुत खूबसूरती से फलसफा ए नजर बयां किया आपने सखी सुंदर रचना।
    फेसबुक पर ज्वॉइन करें।

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    उत्तर
    1. आदरणीया सखी कुसुम जी - बहुत अच्छा लगा, आप की उत्साहवर्धन टिप्णी से |
      आभार
      सादर

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  9. उत्तर
    1. आदरणीया पम्मी जी - सह्रदय आभार सखी |
      सादर

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  10. बहुत खूब......आदरणीया
    बहुत ही सुंदर

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  11. बहुत सुंदर रचना अनिता दी।

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत ही खूबसूरत अल्फाजों में पिरोया है आपने इसे... बेहतरीन

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    उत्तर
    1. आदरणीय संजय जी सह्रदय आभार आप का |
      सादर

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