सोमवार, 11 फ़रवरी 2019

सत्य अहिंसा का पुजारी


                                                         
              सत्य-अहिंसा का पुजारी, बना आम  इंसान, 
           हक़ अपना बाँट रहा, सजी  रसूखदारों  की दुकान |

            दरियादिली में  गया  डूब ,ज़िंदगी को गया भूल ,
              महंगाई को सर पर बिठा,दर्द  में गया  झूल |

            मुहब्बत  की  मारामारी,सभी  को  एक  बीमारी, 
          हाथों में सभी के फोन, क्यों अकेलेपन  की  सवारी ?

           सोच-समझ में उलझा, दिन-रात गोते लगा रहा ,
           चक्रव्यूह  बनी ज़िदगी,ताना-बाना  बुन  रहा |

          आँखों  पर   पट्टी  प्रीत  की,  शब्द  मधुर  बरसाये, 
          मोह  रहे   शब्द  नेताओं  के,प्रीत  में  जनता  सोये |

             एक तबका दर्द  में  डूबा रहा,नेता फूल बरसा रहे, 
           मीठी-मीठी  बातों  से,पेट  की  आग बुझा  रहे |

                             -  अनीता सैनी 

43 टिप्‍पणियां:

रवीन्द्र भारद्वाज ने कहा…

बहुत सुंदर जी
व्यंगात्मक रचना

Meena Bhardwaj ने कहा…

यथार्थ पर सुन्दर व्यंग्यात्मक रचना ।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

यथार्थ जीवन सजीव चित्रण
सुंदर रचना

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार सखी
सादर

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

आम इन्सान तो नेताओं से ठगे जाने और उन से अपना खून चुसवाने के लिए पैदा हुआ है. यही उसकी नियति है.

Nitish Tiwary ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति।

विकास नैनवाल 'अंजान' ने कहा…

सुन्दर रचना।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (13-02-2019) को "आलिंगन उपहार" (चर्चा अंक-3246) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय | बहुत ख़ुशी हुई आप की टिप्णी मिली |
क्या यह नियति कभी नहीं बदलेगी ?
देख कर लग रहा है हम विनाश की और अग्रसर हो रहे है |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय चर्चा में स्थान देने के लिए |
सादर

Unknown ने कहा…

सुन्दर व्यंग रचना

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार
सादर

Pammi singh'tripti' ने कहा…





आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 13 फरवरी 2019 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीया पम्मी जी
पांच लिंकों का आनन्द में मुझे स्थान देने के लिए |
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

बेहतरीन रचना सखी

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Himkar Shyam ने कहा…

बहुत ख़ूब

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

मुकेश सैनी ने कहा…

सोच समझ में उलझा, दिन - रात गोते लगा रहा ,
चक्रव्यूह बनी जिंदगी, ताना - बाना बुन रहा |
बहुत खूब ।

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत लाजवाब

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय लोकेश जी - सह्रदय आभार
सादर

Sweta sinha ने कहा…

सत्य वचन बेहद सार्थक सृजन अनीता जी..👌👌

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

मन की वीणा ने कहा…

वाह धार दार यथार्थ ।
सार्थक रचना सखी।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Abhilasha ने कहा…

बेहतरीन रचना सखी

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Sudha devrani ने कहा…

एक तबका दर्द में डूबा रहा, नेता फूल बरसा रहे,
मीठी - मीठी बातों से , पेट की आग बुझा रहे |
सटीक प्रस्तुति....
बहुत ही लाजवाब।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

सुंदर लेखन । बहुत-बहुत बधाई आदरणीय ।

अनीता सैनी ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

Prakash Sah ने कहा…

सुन्दर रचना

RAKESH KUMAR SRIVASTAVA 'RAHI' ने कहा…

जनता की कमियों एवं पीड़ा को व्यक्त करती सुन्दर रचना.

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

संजय भास्‍कर ने कहा…

हर शब्द अपनी दास्ताँ बयां कर रहा है आगे कुछ कहने की गुंजाईश ही कहाँ है बधाई स्वीकारें

अनीता सैनी ने कहा…

शुभ प्रभात आदरणीय 🙏🙏
उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए, तहे दिल से आभार आप का |
सादर