गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

पलाश बन खिल जाना


                             सजा  रही जीवन गुलदस्ता,  
                               तुम  प्रीत  फूल ले आना,   
                               मधुवन महके  जीवन का,  
                            तुम पलाश बन खिल जाना |


                              तपन  बहुत है जीवन  की, 
                             तुम  पतझड़  में  मुस्काना,  
                          आँधीं  का झौंका  का आये द्वार पर,  
                         तुम गुलमोहरी  मधुमास  सजाना|


                            गर  मायूसी  के  मोती  पहनूँ, 
                            तुम ख़ुशी  के तराने  गुनगुनाना,  
                            अकेलेपन   के   झौंकों   को, 
                             तुम  पलाश  बन  महकाना|


                             छूट  रहा  अनुराग  जीवन का,  
                               तुम  माया  बन  लौट  आना, 
                               सपना  बन   बिखरी  यादें, 
                             तुम पलाश  बन  खिल जाना|

                                          - अनीता सैनी 

38 टिप्‍पणियां:

Meena Bhardwaj ने कहा…

कोमल भावों से सजी अनुपम कृति ।

~Sudha Singh vyaghr~ ने कहा…

बहुत भावभीनी रचना 👌 👌 👌

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

रवीन्द्र भारद्वाज ने कहा…

बहुत खूब......
बहुत सुंदर प्रस्तुति

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

Abhilasha ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना सखी

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

व्याकुल पथिक ने कहा…

छूट रहा अनुराग जीवन का
तुम माया बन लौट आना
सपना बन बिखरी यादें
तुम पलाश बन खिल जाना |
बहुत मधुर भाव, प्रणाम।
बहुत मधुर भाव

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

बहुत सुन्दर अनीता जी.
आजकल तो हमारे सभी मित्रगण वसंत के स्वागत में पलक-पांवड़े बिछा रहे हैं. लगता है कि सब पर बिहारी, देव और पद्माकर की छाया पड़ गयी है.

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय आप की उत्साहवर्धन टिप्णी मिली | बहुत ख़ुशी हुई |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत- बहुत आभार आदरणीय आप का
सुन्दर टिप्णी के लिए | आप की टिप्णी से लगता है कुछ अच्छा लिखा है | सर अहो भाग्य हमारे, बिहारी, देव और पद्माकर की छाया हम पर पड़े |सर हमक़दम पर साप्ताहिक विषय मिलता है इस बार का विषय" पलाश " था उसी को आधार मानकर रचना लिखी |आशीर्वाद बनाये रखे |
सादर

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तूति, अनिता दी।

Kailash Sharma ने कहा…

सज़ा रही जीवन गुलदस्ता
तुम प्रीत फूल ले आना
मधुवन महके जीवन का
तुम पलाश बन खिल जाना |
....वाह...बहुत सुन्दर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन
टिप्णी के लिए |
सादर

deepshikhaaj ने कहा…

वाह......अति सुंदर अभिव्यक्ति सखी ।

Anuradha chauhan ने कहा…

बेहतरीन रचना सखी

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार सखी आप का
सादर

Himkar Shyam ने कहा…

बहुत ख़ूब

drindira .blogspot .com ने कहा…

वाह अति सुन्दर ..मनमोहक और रूहानी लेखन 👍👍👍👍👍👍

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए |
सादर

Sudha devrani ने कहा…

बहुत ही सुंदर पलाश सी खूबसूरत....
वाह!!!

अनीता सैनी ने कहा…

धन्यवाद सखी
सादर

Prakash Sah ने कहा…

वाह्ह्ह! लाजवाब रचना। शब्दों का सुन्दर चयन।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

व्याकुल पथिक ने कहा…

बहुत भावपूर्ण , प्रणाम।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

नमस्ते,

आपकी यह प्रस्तुति सोमवार 18 फ़रवरी 2019 को प्रकाशनार्थ "पाँच लिंकों का आनन्द" ( https://halchalwith5links.blogspot.com ) के विशेष सोमवारीय आयोजन "हम-क़दम" के अट्ठावनवें अंक में सम्मिलित की गयी है।

अंक अवलोकनार्थ आप सादर आमंत्रित हैं।

सधन्यवाद।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय मुझे हमक़दम में स्थान देने के लिए |
सादर

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

सज़ा रही जीवन गुलदस्ता
तुम प्रीत फूल ले आना
मधुवन महके जीवन का
तुम पलाश बन खिल जाना |
सुरीली रचना, मन को छू कर गुजरती हुई। मादक रंग धोलती हुई। शुभकामनाएं व बधाई ।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति :)
बहुत दिनों बाद आना हुआ ब्लॉग पर प्रणाम स्वीकार करें

अनीता सैनी ने कहा…

आप का ब्लॉग पर तहे दिल से स्वागत है आदरणीय |सह्रदय आभार आप का उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए |
प्रणाम
सादर |

रेणु ने कहा…

प्रिय अनिता सुंदर गेयता पूर्ण आपकी ये रचना मुझे अंदर तक छु गयी | कितनी निश्छल मनुहार पिरोई गयी है रचना में | एक सुंदर सरस और सरल सा गीत जो जिओ मन को छू जाए | मेरा प्यार |

रेणु ने कहा…

प्रिय अनिता नयी रचना जो मैंने FB पर पढ़ी थी इस समय मुझे ब्लॉग पर नहीं मिल पाई देखना जरुर |