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शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

क़रार

                                       

                           गुम  हुआ क़रार, 
                         ज़माने की आबोहवा में, 
                 मुहब्बत की गहराइयों  में, 
                         डूब  गया  ग़म सुकूं  की तलाश  में  |

                         क़रार-ए-जंग  छिड़ी,  
                      मुहब्बत के बाज़ार   में, 
                           सुकूं-ए-तलब, 
                      मिला ग़मों के दरबार   में |

                        दिल  ने  जलाये   चराग़ 
                      मुहब्बत   के    इंतज़ार में 
                 सुकूं  के  दौर  में  क़ुर्बान   हुआ प्यार 
                     दिल-ए-क़रार  के  बाज़ार  में |

               सुकूं  की  चाहत  में  दौड़ा  रही ज़िंदगी  
               फ़लक़-सितारों  से  फ़रियाद  कर  बैठी 
                        मिले   क़रार-ए-ज़िंदगी  
                         यही   ऐतबार   कर  बैठी |

                                      - अनीता सैनी 

30 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब अहसासों की कविता.... भावमय करते शब्‍दों का संगम बिल्‍कुल

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    1. आदरणीय संजय जी सह्रदय आभार आप का उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए |
      सादर

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  2. उत्तर
    1. सस्नेह आभार प्रिय सखी दीपशिखा जी |
      सादर

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  3. सुन्दर प्रस्तुति अनीता जी ! बहुत खूब !

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    1. सह्रदय आभार आदरणीया साधना जी उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए | प्रणाम
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  4. उत्तर
    1. सह्रदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए |प्रणाम स्वीकारे
      सादर

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  5. फलक सितारों से फरियाद कर बैठा
    इस तरह करारे जिन्दगी मिलेगी सोचता रह गया .......
    बेहतरीन पंक्तियां

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    1. प्रिय सखी रितु जी सस्नेह आभार आप को |
      सादर

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (23-02-2019) को "करना सही इलाज" (चर्चा अंक-3256) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सह्रदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए | आशीर्वाद बनाए रखे |प्रणाम
      सादर

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  7. भावपूर्ण अभिव्यक्ति, प्रणाम।

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  8. क़रार -ए - जंग छिड़ी
    मोहब्बत के बाज़ार में
    सुकूं -ए - तलब मिला
    ग़मों के दरबार में |
    बहुत ही सुन्दर...
    वाह!!!

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    1. प्रिय सखी सुधा जी आप को बहुत सा सस्नेह आभार |स्नेह
      सादर

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  9. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 22/02/2019 की बुलेटिन, " भाखड़ा नांगल डैम" पर निबंध - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. सह्रदय आभार आदरणीय ब्लॉग बुलेटिन में मुझे स्थान देने के लिए |
      सादर

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  10. सुकूं के दौर में शहीद हुआ प्यार
    दिल -ए -क़रार के बाज़ार में |
    बहुत खूब सखी .....

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  11. बहुत सुन्दर अनीता जी.
    प्यार में तो क़दम-क़दम पर धोखा है और क़दम-क़दम पर सब्र की अग्नि-परीक्षा है. जिगर मुरादाबादी कह गए हैं -
    ये इश्क़ नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे,
    इक आग का दरिया है, और डूब के जाना है.

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    1. सह्रदय आभार आदरणीय शानदार टिप्णी के लिए | आशीर्वाद बनाए रखे |
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      सादर

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