रविवार, 21 अप्रैल 2019

झरोखा


खिलखिलाते  हुए बचपन का, 
या कहूँ मायूस  बुढ़ापे का  सहारा, 
ठुकराया  जिसे  ज़माने  ने,  
उसे   झरोखे   ने   पुकारा |

समेटे दिल में यादों का समुंदर ,  
झुकी पलकों से सँवारा, 
टेक उसके कंधों पर सर, 
उसी की नज़रों से जहां  को निहारा |

एक अरसे से समेटे ख़ामोशी, 
वहीं  इंतज़ार का  बना  बसेरा,  
कभी  झाँकतीं   थीं   ख़्वाहिशें, 
वहाँ  तन्हाइयों  का  हुआ  सवेरा|

- अनीता सैनी 

22 टिप्‍पणियां:

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

एक अरसे से समेटे ख़ामोशी
वहीं इंतज़ार का बना बसेरा
कभी झाँकती थी ख़्वाहिशें
वहाँ तन्हाइयों का हुआ सवेरा..
मन को वेदती रचना। शुभकामनाएं स्वीकार करें ।

मन की वीणा ने कहा…

वाह बहुत खूबसूरती से लिखा आपने झरोखे और अहसास।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 21/04/2019 की बुलेटिन, " जोकर, मुखौटा और लोग - ब्लॉग बुलेटिन“ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Sweta sinha ने कहा…

वाहह्हह... मर्मस्पर्शी सृजन बहुत बढिया👌

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

मर्मस्प्रशी रचना

Anuradha chauhan ने कहा…

वाह बहुत ही बेहतरीन रचना सखी 👌

https://www.kavibhyankar.blogger.com ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

रेणु ने कहा…

समेटे दिल में यादों का समंदर
झुकी पलकों से संवारा
टेक उस के कंधों पर सर
उसी की नज़रों से जहाँ को निहारा
प्रिय अनीता -- झरोखे से जीवन की खुशियाँ ढूंढती
विकल मन के सुखद अतीत और वर्तमान को आपने
करुणामई दृष्टि से देखा है |झरोखे किसी भी घुटन भरे जीवन के लिए प्राणवायु का प्रमुख द्वार होते हैं | एक दुर्लभ विषय पर बहुत सार्थक लिखा आपने | शुभकामनायें और प्यार |

अमित निश्छल ने कहा…

एक अरसे से समेटे ख़ामोशी
वहीं इंतज़ार का बना बसेरा
कभी झाँकती थी ख़्वाहिशें
वहाँ तन्हाइयों का हुआ सवेरा
. प्रभावी रचना। मन को झकझोरती भावाभिव्यक्ति मैम।

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार दी जी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय ब्लॉग बुलेटिन में स्थान देने के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी श्वेता जी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय रेणु बहन
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय आप का
सादर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (23-04-2019) को "झरोखा" (चर्चा अंक-3314) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
पृथ्वी दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा में मुझे स्थान देने के लिए
सादर

Sudha devrani ने कहा…

वाह!!!
लाजवाब सृजन....

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर