गुरुवार, 25 अप्रैल 2019

ज़िंदगी तू कितनी बदल गयी




सुकून की तलाश में  भटक  रही ज़िंदगी 
ग़मों  से  खेल  गयी,  
खुशियों से भरा दामन लाँघ,
हँसी  को  तरस   गयी |


ज़िंदगी  के  लिये  दौड़  रही  दुनिया, 
वक़्त, ज़िंदगी   निगल  गयी,  
तराजू  से  तौल  रहे  प्रीत,  
ज़िंदगी ,  प्रीत   को    तरस  गयी  |


बेहाल  हुये  रिश्ते, 
हाल पूछने  से  शान  बदल  गयी, 
बहुत   गम  है  सीने  में, 
रोने  से  आँखें   घबरा  गयीं |


सामने  खड़ी  ज़िंदगी, 
सजाने  की  चाह  बदल  गयी 
पल-पल दम तोड़ती इंसानियत, 
मुस्कुराने  की  राह  बदल  गयी  |

- अनीता सैनी 

30 टिप्‍पणियां:

अमित निश्छल ने कहा…

बहुत ख़ूब आदरणीया।

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

शुभा ने कहा…

वाह!!सखी ,बहुत खूब !!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

सार्थक और सटीक अभिव्यक्ति

संजय भास्‍कर ने कहा…

बेहद सटीक एवं गहन भाव को बड़ी खूबसूरती के साथ

मुकेश सैनी ने कहा…

वाह !अनिता जी बहुत खूब |

मन की वीणा ने कहा…

सत्य यथार्थ का आभास देती सुंदर रचना।

Anuradha chauhan ने कहा…

बेहतरीन रचना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (26-04-2019) को "वैराग्य भाव के साथ मुक्ति पथ" (चर्चा अंक-3317) (चर्चा अंक-3310) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय कुसुम दी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा में स्थान देने के लिए
सादर

रवीन्द्र भारद्वाज ने कहा…

यथार्थ
मार्मिक रचना
🙏🙏🙏

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत आभार आदरणीय
सादर

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,

आपकी लिखी रचना शुक्रवार २६ अप्रैल २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी श्वेता जी तहे दिल से आभार आप का पाँच लिंकों में स्थान देने के लिए
सादर

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

इब्तिदाए इश्क़ है, रोता है क्या,
आगे-आगे देखिए, होता है क्या.

अनीता सैनी ने कहा…

प्रीत की राह चला जीवन
काँटों से मोहब्बत, दर्द से यारी यही ज़ुल्म किया संगीन |

Sudha devrani ने कहा…

जिन्दगी पल पल बदल ही तो रही है...
बहुत सुन्दर रचना....
वाह!!!

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर

Meena Bhardwaj ने कहा…

गहन भावों की गहन अभिव्यक्ति ..., बहुत हृदयस्पर्शी सृजन अनीता जी ।

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी मीना आप का तहे दिल से आभार
ढेर सारा स्नेह बहन आप का
सादर

रेणु ने कहा…

सुकून की तलाश में भटक रही ज़िंदगी
गमों से खेल गई
खुशियों से भरा दामन लाँघ,
हँसी को तरस गई |
बहुत सुंदर प्रस्तुति प्रिय अनीता | जीवन के सफर में पल पल बदलते रंगों का सुंदर शब्दांकन किया आपने | भावपूर्ण विचारणीय विषय की रचना के लिए हार्दिक शुभकामनायें |

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी रेणु जी आप की टिप्णी हमेशा से ही उत्साहवर्धन और बहुत ही सुन्दर रही है आप मेरे ब्लॉग पर पधारी यह सौभाग्य है मेरा ,अपना स्नेह यूँ ही बनाये रखे
सादर

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत उम्दा

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर