शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019

वेदना जननी प्रीत की


क्यों  पहनी   मायूसी, ख़ामोशी  में  सिमटा प्यार, 
 उतरी वेदना  अंतरमन में  भाग्य उदय हुआ उसका हर बार |

क्यों  मिटाया  ख़ुद  को  जीवन  पर  कुंडली   मार,  
सुख पीड़ा का  बहुत  बड़ा  कवि  हृदय  का  सार |

नाज़ुक तन फूलों की डार, लिये भीतर  पाषण-सा भार ,
निराधार जीवन उसका न बनी वेदना जिस अंतर मन का  सार |

सिसकी वेदना  सीने  में बातें  उससे  हुईं    इस   बार ,
क़दम-क़दम  पर साथ चली  बन  सुख, का सच्चा आधार |

सीने से लगाये  फिरती, करती  पल-पल  मनुहार 
वेदना  जननी  प्रीत   की   हाथों  से  करती  जीवन  शृंगार|

- अनीता सैनी 

33 टिप्‍पणियां:

अमित निश्छल ने कहा…

उत्तम भाव संप्रेषण।

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत शानदार

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

मुकेश सैनी ने कहा…

शानदार जी

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (28-04-2019) को " गणित के जादूगर - श्रीनिवास रामानुजन की ९९ वीं पुण्यतिथि " (चर्चा अंक-3319) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
....
अनीता सैनी

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन रचना सखी 👌👌👌👌

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

Meena Bhardwaj ने कहा…


सीने से लगाए फिरती, करती पल - पल मनुहार
वेदना जननी प्रीत की हाथों से करती जीवन श्रृंगार..।
श्रेष्ठ भावों से सजी अनुपम रचना ।

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

बहुत सुन्दर अनीता जी.
वियोग ही प्रेम का आधार है और विरह ही काव्य का आधार है.
महर्षि वाल्मीकि से लेकर सुमित्रानंदन पन्त का भी यही मानना है.

मन की वीणा ने कहा…

वाह वाह बहुत खूबसूरत भावों से सजी गहराई तक उतरती सच्ची अभिव्यक्ति।
प्रीत विरह वेदना की जाई ।
अति सुन्दर।

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
२९ अप्रैल २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

रेणु ने कहा…

प्रिय अनीता -- एक फ़िल्मी गीत के बोल हैं -- हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें हम दर्द के सुर में गाते हैं | यही भाव तुम्हारी रचना से प्रकट होते हैं जो सन्देश दे रही है वेदना के रस में पगकर ही इंसान सही अर्थों में सच्चा प्रेम करना सीखता है | इसे वेदना से करुना - दया प्रेम आदि जन्मते हैं और इंसानियत को धन्य कर देते हैं | सस्नेह शुभकामनायें और मेरा प्यार तुम्हारे लिए |

Meena sharma ने कहा…

बहुत सुंदर भाव एवं बेहतरीन अभिव्यक्ति

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आप का आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

जी स्नेह आभार

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी मीना जी तहे दिल से आभार आप का उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रणाम आदरणीय
सहृदय आभार आदरणीय आप का उत्साहवर्धन के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय कुसुम दी आप का तहे दिल से आभार इतनी सुन्दर टिप्णी टिप्णी के लिए | प्रीत विरह वेदना की जाई ....बहुत ही सुन्दर शब्द आप के
आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय श्वेता जी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी रेणु जी बहुत ही सुन्दर और सराहनीय टिप्णी आप की रचना के चार चाँद लगा दिए आप ने
तहे दिल से आभार आप का, स्नेह यूँ ही बनाएं रखे
आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी मीना जी तहे दिल से आभार आप का
सादर

दिगंबर नासवा ने कहा…

सच है की जसके मन में वेदना नहीं वो मनुष्य कहलाने लायक नहीं ...
मन के भाव कोमल न हों ... दुसरे के दर्द से मन द्रवित न हो तो बेमानी है जीवन ...
अच्छी रचना है ...

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय इनती सुन्दर रचना की समीक्षा के
लिए |प्रणाम
सादर

Pammi singh'tripti' ने कहा…

अनुपम कृति

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

सार्थक रचना

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय, आप का आशीर्वाद यूँ ही बना रहे
आभार
सादर

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

क्यों पहनी मायूसी, ख़ामोशी में सिमटा प्यार
उतरी वेदना अंतर मन में भाग्य उदय हुआ उस का हर बार

क्यों मिटाया ख़ुद को जीवन पर कुण्डी मार
सुख पीड़ा का बहुत बड़ा कवि हृदय का सार..

आपकी विशिष्ट लेखन शैली की उत्कृष्ट रचना। मौलिकता का संवर्धन करती नई सृजन हेतु शुभकामनाएं स्वीकार करें आदरणीया अनीता जी।

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय पुरुषोत्तम जी आप की उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए | मार्गदर्शन करते रहे
आभार