गुरुवार, 2 मई 2019

क़दमों के निशां




प्रीत पद से बाँध, होठों पर सजा मुस्कान, 
वर्दी  सुर्ख़   लाल  पहन  लेना, 
भारत  माँ  से  किया   जो  वादा, 
मेरी   प्रीत   भुला  देना |

सो  चुका  जनमानस, 
निद्रा में  व्यवधान  न आने   देना, 
सीने  पर  लेना  हर ज़ख़्म, 
ज़ालिम  का  निशां  मिटा देना |

आह्वान करुँ  जनमानस से ,
हर  सैनिक को सीने से लगा लेना, 
माँ   के  स्नेह  को   तरसता, 
माँ  की  गोद  में  सुला  देना |

अहिंसा  का  पुजारी  मेरा  देश, 
शांति  का बिगुल   बजा देना, 
अंतरमन  से  उठी    चेतना, 
दबाकर  फिर  सुला  देना |

दिन, सप्ताह, और महीना, 
 कलेजे पर  फिर  निशान बना देना,  
 सूखा न आँख  का  पानी, 
    वीरांगना  को   तिरंगा  थमा  देना |

- अनीता सैनी 

23 टिप्‍पणियां:

Anuradha chauhan ने कहा…

बेहद हृदयस्पर्शी रचना सखी 👌

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

क्या तिरंगे में ही जाना है नियति,
काम कुछ ऐसा भी होना चाहिए,
देश के दुश्मन से सब, मिलकर लड़ें,
औ सियासत, दूर रखनी चाहिए.

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

मार्मिक कविता ... विचारोत्तेजक

Meena Bhardwaj ने कहा…

मार्मिक सृजन अनीता जी । अप्रतिम भावाभिव्यक्ति ।

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

क्या तिरंगे में ही जाना है नियति ...यही मैं अपने आप से पूछती हूँ|तहे दिल से आभार आप का आदरणीय समीक्षा के लिए
आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

मुकेश सैनी ने कहा…

सो चुका जन मानस
निद्रा मे व्यवधान न आने देना
सीने पर लेना हर जख़्म
ज़ालिम का निशान मिटा देना......

अनीता जी क्या खूबसूरत कविता है

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आप का
सादर

मन की वीणा ने कहा…

बहुत गहरी संवेदना से भरपूर हृदय स्पर्शी सृजन सखी ।
एक प्रश्न।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (03-05-2019) को "कंकर वाली दाल" (चर्चा अंक-3324) (चर्चा अंक-3310) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अमित निश्छल ने कहा…

उम्दा रचना मैम। अति उत्तम।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

उर्मिला सिंह ने कहा…

बेहतरीन,ह्रदयस्पर्शी रचना

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय दी जी
सादर

रेणु ने कहा…

दिन, सप्ताह, और महीना
कलेज़े पर फ़िर निशान बना देना
सूखा न आँख का पानी
वीरांगना को तिरंगा थमा देना
प्रिय अनिता एक सैनिक की अंतर्वेदना को बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति दे है तुमने | सस्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय रेणु दी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय रेणु दी आप ने बहुत अच्छी समीक्षा की है पर मैं अपने मन की बात रखना चाहती हूँ |उपर वाले दो पदों में नाइका अपने पति के सामने अपने मन की बात कह रही है बाक़ी वह समाज के...

विश्वमोहन ने कहा…

वाह! सलाम उस देश की उस महान ललना और उसके दिव्य मंजुल एवं उदात्त भावों को! नि:शब्द नमन!

अनीता सैनी ने कहा…

जी बहुत बहुत शुक्रिया आप का
सादर