शनिवार, 20 जुलाई 2019

एहसासात का समुंदर



एहसासात के समुंदर में प्रेम की कश्ती, 
मझदार तक पहुँचा दो तो कोई बात हो |

फ़ज़ाओं में पनप रही  नेह की महक,
आशियाना हमारा महका दो तो कोई बात हो |

 ख़ुशगवार  ज़िंदगी  मुठ्ठी में कुछ मायूसी के लम्हे, 
इन्हीं लम्हों को  प्रीत का  झूला झुला दो तो कोई बात हो |

गुज़र गये वो पल एक बार फिर लौटा  दो, 
उन्हीं  पलों में महक तुम्हारी महका दो तो कोई बात हो |

वक़्त के थपेड़ों से यूँ घबराया  न करो,  
इन्हीं थपेड़ों  में मशाल प्रीत की जला दो तो कोई बात हो |

एहसासात  के अनगिनत मोती धारण किये साँसों पर, 
इन्हें छूकर तुम  कोहिनूर बना  दो तो कोई बात हो |

- अनीता सैनी 

31 टिप्‍पणियां:

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

वाह!मख़मली एहसासात को शब्द रूपी मोतियों में पिरोकर अभिव्यक्ति को हृदयस्पर्शी बना दिया है.

SUJATA PRIYE ने कहा…

वाह! इन थपेड़ो में मशाल प्रीत की जला दो त कोई बात हो। बेहतरीन।

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत बेहतरीन

Abhilasha ने कहा…

बेहतरीन रचना सखी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (22-07-2019) को "आशियाना चाहिए" (चर्चा अंक- 3404) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय |उत्साहवर्धन समीक्षा हेतु
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

शुक्रिया सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने हेतु
प्रणाम
सादर

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
२२ जुलाई २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

Anuradha chauhan ने कहा…


ख़ुशगवार ज़िंदगी मुठ्ठी में कुछ मायूसी के लम्हें
इन्हीं लम्हों को प्रीत का झूला झुला दो तो कोई बात बेहतरीन रचना सखी

मन की वीणा ने कहा…

वाह कितने रेशमी जज़्बात पिरोते हैं ।
बहुत सुंदर कोमल अहसास लिए उम्दा सृजन।

Sudha devrani ने कहा…

एहसास के समुंदर में प्रेम की कश्ती,
मझदार तक पहुँचा दो तो कोई बात हो |
वाह!!!
लाजवाब सृजन...

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार प्रिय श्वेता दी जी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय कुसुम दी जी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय दी जी
सादर स्नेह

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

एहसास के अनगिनत मोती इन्हे कोहिनूर बना दें तो कोई बात हो वाह अनीता जी सुन्दर एहसास

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय दी जी
सादर

शुभा ने कहा…

वाह!!खूबसूरत एहसास !!प्रिय सखी ।

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय सखी |
सादर स्नेह

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना, अनिता दी।

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय ज्योति बहन
सादर स्नेह

उर्मिला सिंह ने कहा…

लाज़बाब रचना

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय दी जी
सादर

संजय भास्‍कर ने कहा…

इन्हीं लम्हों को प्रीत का झूला झुला दो तो कोई बात....बेहतरीन

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार सर
सादर

रेणु ने कहा…

रूहानी मखमली एहसासो से भरी बहुत ही प्यारी रचना प्रिय अनीता। लेखन का र्य नया रंग बहुत मनमोहक हैं ।

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय रेणु दी जी
सादर स्नेह

उर्मिला सिंह ने कहा…

शानदार लेखन