सोमवार, 29 जुलाई 2019

हाँ यह वही सावन है



ज़ुल्म ! पवन के अल्हड़ झोंकों का,
कि  घटाएँ फिर ज़हन  में  उमड़  आयीं,
 चित्त ने दी चिंगारी,
एहसास फिर स्वप्न में सुलग आये, 
 भरी बरसात में जला,
  हाँ  यह  वही  सावन  है |


न धुँआ उठा, न धधका तन,
सपनों का वही जौहर है, जो  बेशुमार  जला,
बेलोश बेचैनियों में सिमटा बेसुध, 
प्रति पल  अलाव-सा जला,
हाँ  यह वही सावन है |

कुछ बुझा-सा,
कुछ  ना-उम्मीदी  में जला,
डगमगा रहे क़दम,
 फिर  ख़ामोशी से चला,
जीवन के उस पड़ाव पर,
सिसकियों ने सहलाया,
 हाँ  ता-उम्र जला यह वही सावन है |

 पलकों को भिगो ,
मुस्कुराहट के चिलमन  में  उलझ ,  
दिल के चमन को बंजर कर गया ,
 हसरतों का खिला फूल,
शोहरत  का  दे  लिबास,
भरी  महफ़िल में,
 अरमानों संग जला,
हाँ यह वही सावन है |


बेरहम भाग्य को भी न आया रहम,
 रूह-सा  रूह  को  तरसता मन,
एक अरसे तक सुलगा,
फिर भी न हुआ कम,
पेड़ की टहनियों से छन-छनकर जला,
हाँ  यह वही सावन है |

- अनीता सैनी

16 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (30-07-2019) को "गर्म चाय का प्याला आया" (चर्चा अंक- 3412) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

वाह ! धारा के विपरीत सावन को नये बिम्बों और प्रतीकों में ऐसे चित्रित किया कि पाठक अचंभित रह जाय. सुन्दर अभिव्यक्ति.

Jyoti Dehliwal ने कहा…

अनिता दी,सावन को एक नए रूप में ही प्रस्तुत किया आपने। बहुत सुंदर।

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय सुन्दर समीक्षा के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय ज्योति बहन
सादर स्नेह

Pammi singh'tripti' ने कहा…

वाह!!बहुत सुंदर।

मन की वीणा ने कहा…

बहुत खूब बहुत शानदार प्रस्तुति।

Sudha devrani ने कहा…

सावन का यह रूप...
बेहतरीन सृजन
वाह!!!

अनीता सैनी ने कहा…

शुक्रिया प्रिय पम्मी जी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

शुक्रिया प्रिय कुसुम दी जी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

शुक्रिया प्रिय सुधा दी जी
सादर स्नेह

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

बेहतरीन रचना का सृजन हुआ है। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया।

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय
प्रणाम
सादर

रेणु ने कहा…

न धुँआ उठा, न धधका तन,
सपनों का वही जौहर है, जो बेशुमार जला,
बेचैनियों में सिमटा बेसुध,
पल-पल अलाव-सा जला,
हाँ यह वही सावन है |
भावनाओं के अनगिन रंग समेटे भावपूर्ण रचना प्रिय अनिता | सस्नेह --

अनीता सैनी ने कहा…

शुक्रिया प्रिय रेणु दी
सादर