सोमवार, 12 अगस्त 2019

मुझे ख़ुशी ही रहने दो



  कुछ पल की ख़ुशी मुकम्मलकर,
 क़ायनात ने  बरसाया,  
ख़ुशी का कोहरा ,
वही कोहरा सुकून का सैलाब ,  
लेकर उतरता है  पलकों पर  और , 
 चित्त को कर देता  है तृप्त |

कुछ पल बैठ पहलू  में मेरे,
 मुठ्ठी में थमाया मोहब्बत का मोती,
 और वहाँ से जाने को आतुर नज़र आयी,  
थामना चाहती हूँ हाथ उसका,  
फ़रियाद करती हूँ न जाने की, 
वक़्त पर न आने का वास्ता देते हुए,
जतन करती हूँ आग़ोश में भरने का ,
ग़मों की पोटली पटक सामने, 
ज़ख़्म उसे दिखाती हूँ |

मुस्कुराते हुए कहती है वह !
मैं ख़ुशी हूँ ,
मुझे ख़ुशी ही रहने दो, 
पलकों पर रहती हूँ ,
पलकों पर रहने  दो,
बहती हूँ  हृदय में, 
आँख का पानी बन बहने दो,
क्यों करती हो ? 
संताप  बिछड़ने का,
मुसाफ़िर हूँ, 
मुसाफ़िर ही रहने दो |

वो लम्हात  जब ठहरी थी पलकों पर,  
उन्हीं  एहसासात  को सीने से लगा ,
मुस्कुराहट  अधरों पर  लिये,
तुम यह दौर दामन में सजा लेना |

पुकारेंगे तेरे कर्म मुझे  ,
कृतित्व की महक से महकेगी फ़ज़ा,
दौड़ी आऊँगी मैं ज़िंदगी में  तेरी ,
हृदय में समा फिर उतर जाऊँगी, 
पलकों पर  तेरी |

मनुहार से भी न मानी ,
जोश उफ़न आया उसका, जाने की ज़िद ठानी, 
आँखों के अनमोल मोती न रोक पाये राह उसकी,
तरस उसको  आया वक़्त को मरहम बताया, 
 कहा आँसुओं  में न बहाना  जीवन, 
बह जायेगी ज़िंदगी  तेरी, 
ठंडा पड़ जायेगा साँसों का सैलाब ,
क्षीण हो जायेगी मन की शक्ति,
कर्म का पहिया न करेगा पुकार ,
अजनबी की तरह गुज़र  जाऊँगी, 
उस वक़्त ,वक़्त के उस पार  |

हिदायत उस की, मेरी हसरत हार गयी ,
ख़ुशी के कसैलेपन का कारगर निवारण, 
हाथ में न थमाया , साँसों में घोल गयी |

- अनीता सैनी 

12 टिप्‍पणियां:

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

ख़ुशी एक सुन्दर एहसास है जो हमारे दिल को मख़मली सुकून देता है. ख़ुशी के जीवनभर अनवरत यात्रा चलती रहती है. किसके हिस्से में कितनी ख़ुशी होगी इसका पैमाना अनिश्चित.
रचना में ख़ुशी के चरित्र पर गहन चिंतन हुआ है. ख़ुशी का कोई तय फार्मूला नहीं है. जो इसकी तलाश में रहता है उसे ख़ुशी अपनी छत्रछाया में ज़रूर लेती है.
गंभीर विषय को सरलीकृत करने का प्रयास प्रभावशाली है.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (14-08-2019) को "पढ़े-लिखे मजबूर" (चर्चा अंक- 3427) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

विश्वमोहन ने कहा…

बहुत बढ़िया।

Atoot bandhan ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

मन की वीणा ने कहा…

खुशी पर बहुत सुंदर विश्लेषण दिया आपने रचना के माध्यम से। खुशी एक छलावे सी आती भरमा कर चली जाती ,न आंसू रोक पाते उसे ना कोई दीवार। अ
रचना ।
खुशी का अदृश्य आभामंडल
छुपा कहीं तेरे मेरे अंदर
बस मन की आंखों से पी ले
अमृत का कतरा कतरा
और भर ले मन गागर मे
ये वो नियामत है जो
अंदर और अंदर खोजनी है
पा गये तो बस आनंद का
सागर ही सागर है।

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन समीक्षा के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

शुक्रिया सर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय कुसुम दी जी आप की समीक्षा हमेशा हृदय में घर कर जाती है इस अपार स्नेह के लिए |
आप को प्रणाम
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

पुकारेंगे तेरे कर्म मुझे ,
कृतित्व की महक से महकेगी फ़ज़ा,
दौड़ी आऊँगी मैं ज़िंदगी में तेरी ,
हृदय में समा फिर उतर जाऊँगी,
पलकों पर तेरी |बेहद खूबसूरत रचना सखी

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार बहना
सादर