शनिवार, 9 नवंबर 2019

मौन में फिर धँसाया था मैंने उन शब्दों को



 कुछ हर्षाते
 लम्हे 
अनायास ही
 मौन में मैंने 
धँसाये  थे  
आँखों  के
 पानी से भिगो
 कठोर किया उन्हें  
साँसों की 
पतली परत में छिपा
 ख़ामोश
 किया था जिन्हें 
फिर भी 
 हार न मानी उन्होंने 
 उसे 
 अतीत की 
दीवार में चिनवा चुप्पी साधी थी 
मैंने  
उन लम्हों में 
बिखर गये थे कुछ शब्द  
कुछ लिपट गये
 भविष्य के पैरों से   
वक़्त की
उजली कच्ची 
 धूप सहते हुए 
 ज़िंदगी
 के गलियारे में 
अपने
 अस्तित्त्व 
की नींव गढ़ते
  राह में मुखर हो 
 समय की 
दहलीज़ पर 
इतिहास के पन्नों में 
बरगद 
की छाँव बन 
भविष्य की अँगुली 
थाम
 जीवन की 
राह में मील के 
पत्थर बन  
पूनम की साँझ में 
मृदुल मौन बनकर वे 
पराजय का
 दुखड़ा भी न रो पाये 
तीक्ष्ण असह वेदना 
से लबालब 
अनुभूति का जीवन 
 जीकर  
पल प्रणय में भी नहीं खो पाये 
तभी उन्हें  
मौन में फिर धँसाया था 
मैंने  |


© अनीता सैनी 

26 टिप्‍पणियां:

मुकेश सैनी ने कहा…

उन लम्हों में
बिखर गये थे कुछ शब्द
कुछ लिपट गये
भविष्य के पैरों से
वक़्त की
उजली कच्ची
धूप सहते हुए
ज़िंदगी
के गलियारे में
अपने
अस्तित्त्व
की नींव गढ़ते
राह में मुखर हो
समय की
दहलीज़ पर
इतिहास के पन्नों में
बरगद
की छाँव बन
भविष्य की अँगुली
थाम
जीवन की
राह में मील के
पत्थर बन
पूनम की साँझ में
मृदुल मौन बनकर वे
पराजय का
दुखड़ा भी न रो पाये... क्या बात है ज़िंदगी समेट ली.....
बहुत सुन्दर
लिखती रहो.

Rohitas ghorela ने कहा…

कुछ हद्द तक मौन कर गयी आपकी रचना।
गज़ब की अभिव्यक्ति।

मेरी नई पोस्ट पर स्वागत है👉👉 जागृत आँख 

Anita Laguri "Anu" ने कहा…

जुबां भले ही खामोश रह गई, पर अंतस मन के भाव शब्दों का रूप धारण करके बाहर आ गए..... कमाल की अभिव्यक्ति..👌

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

वाह!
मौन से मुखर होने का सफ़र तय करने में अनेक उतार-चढ़ाव नज़र आते हैं। कहीं-कहीं पेचीदा घुमाव नज़र आते हैं जो रचना की ख़ूबसूरती बनते हैं।
मौन भी जीवन का महत्त्वपूर्ण भाव और स्थिति है जो वक़्त आने पर अपनी जटिलता और उपयोगिता को सिद्ध करता है। मौन संशय पैदा कर सकता है तो किसी को संकट में पड़ने से भी बचा लेता है।
उत्कृष्ट सृजन के लिये बधाई एवं शुभकामनाएं।
लिखते रहिए।

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
११ नवंबर २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।,

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (11-11-2019) को "दोनों पक्षों को मिला, उनका अब अधिकार" (चर्चा अंक 3516) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित हैं….
*****
रवीन्द्र सिंह यादव

Anuradha chauhan ने कहा…

समय की
दहलीज़ पर
इतिहास के पन्नों में
बरगद
की छाँव बन
भविष्य की अँगुली
थाम
जीवन की
राह में मील के
पत्थर बन
पूनम की साँझ में
मृदुल मौन बनकर वे
पराजय का
दुखड़ा भी न रो पाये.... बेहतरीन रचना सखी 👌

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत आभार आपका
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय रोहिताश जी सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार प्रिय अनु. रचना पर सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया श्वेता दी पांच लिंकों के आनंद पर मुझे स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चामंच पर मुझे स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय दीदी जी सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

मन की वीणा ने कहा…

मौन जब किसी मन के आहत भाव से उत्पन्न होता है तो मन उसका मंथन करता है, सामान्य व्यक्ति उन भावों से कभी आहत होता है कभी अवसाद में उतरता है कभी गहन चिंतक बन ऊपर उठ जाता है ,पर यही मौन जब संवेदनशील कवि मन की अनंत गहराई में उतरता है तो साहित्य को अभिनव सृजन दे देता है आपकी इस बेजोड़ रचना की तरह ।
अनुपम।

Meena Bhardwaj ने कहा…

भविष्य की अँगुली
थाम
जीवन की
राह में मील के
पत्थर बन
पूनम की साँझ में
मृदुल मौन बनकर वे
पराजय का
दुखड़ा भी न रो पाये
अप्रतिम भावों की अद्भुत अभिव्यक्ति...अति सुन्दर सृजन अनीता जी ।

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

तारीफ के सारे लफ्जों से परे है रह आपकी रचना। लगता है मौन के पाँवो में आपने महावर मल दिए हैं । साधुवाद व बधाई ।

Kamini Sinha ने कहा…

लाजबाब सृजन ,अनीता जी

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत बहुत उम्दा

अनीता सैनी ने कहा…

वाह!आदरणीया कुसुम दीदी जी आपकी इतनी प्यारी प्रतिक्रिया ने मन मोह लिया। बहुत सारा आभार आपका। आपका स्नेह और आशीर्वाद मुझे यों ही मिलता रहे।
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया सर आपका
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीया कामिनी दीदी जी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया मीना दीदी जी इतनी ख़ूबसूरत प्रतिक्रिया के साथ मेरा हौसला बढ़ाने के लिये। आपका साथ बना रहे।
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर मेरी रचना का एक सारगर्भित प्रतिक्रिया के ज़रिये मान बढ़ाने के लिये।
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर मेरी रचना का एक ख़ूबसूरत टिप्पणी के माध्यम से मान बढ़ाने के लिये। आपकी प्रतिक्रिया से रचना का भाव विस्तार होता है। आपका समर्थन और सहयोग बना रहे।
सादर।

रेणु ने कहा…

मौन और एहसासों का भवभीना शब्द संयोजन प्रिय अनीता । 👌👌 मन का छुती रचना। 👌👌

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया रेणु दीदी जी सुन्दर समीक्षा से रचना का मर्म स्पष्ट के लिये.
सादर