रविवार, 5 जनवरी 2020

राजस्थान के शहर कोटा में



ज़िम्मेदारी के अभाव का घूँट, 
अस्पताल का मुख्यद्वार पी रहा,  
व्यवस्था के नाम पर, 
दम तोड़तीं टूटीं खिड़कियाँ,  
दास्तां अपनी सुना रहीं, 
विवशता दर्शाती चौखट,  
दरवाज़े को हाँक रही, 
ख़राब उपकरणों की सजावट,  
शोभा बेंच की बढ़ा रही, 
 लापरवाही की लीपापोती,  
प्रचार में हाथ स्टाफ़ का बढ़ा रही,  
ऑक्सीजन के ख़ाली सिलेंडर, 
उठापटक में वक़्त ज़ाया कर रहे,  
इमरजेंसी वार्ड की नेम प्लेट,  
रहस्य अपना छिपा रही,  
मरीज़ों की विवशता तितर-बितर, 
सर्द हवा में गरमाहट तलाश रही, 
पलंगों का अभाव, 
मरीज़ों के चेहरे बता रहे,  
चूहे-सुअर आवारा पशुओं का दाख़िला,  
बिन पर्ची सुनसान रात में हो रहा, 
राजनेता सेक रहे,   
सियासत की अंगीठी पर हाथ,  
पूस  की ठिठुरती ठंड में, 
नब्ज़ में जमता नवजात रुधिर, 
ठिठुरन से ठण्डी पड़ती साँसें, 
मासूमों की लीलती जिंदगियाँ, 
राजस्थान के शहर  कोटा में, 
अपंग मानसिकता का,  
अधूरा कलाम सर्द हवाएँ सुना रहीं। 

© अनीता सैनी  

16 टिप्‍पणियां:

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

गोरखपुर या कोटा हो,
पर्स हमारा, मोटा हो !
मरने वाले मरा करें,
लाभ, कभी ना खोटा हो,

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

बच्चों की सरकारी अस्पताल में मौत अब सामान्य बात हो गयी है. सरकारी तंत्र की विफलता जानबूझकर दर्शायी जाती है ताकि निजीकरण जैसे पूँजीवादी विचार की जड़ें और अधिक गहरी हो सकें. एक ओर सरकारों के पास फंड की कमी है वहीं दूसरी ओर सरकारों के अनावश्यक ख़र्चे और अति भव्यतापूर्ण कार्यक्रम संपन्न होने के लिये पैसा कहाँ से आता है?
आक्रोशभरी व्यंग्यपूर्ण रचना.

शुभा ने कहा…

करारा व्यंग्य किया है सखी अनीता जी आपने । कोटा ही क्या ,सरकारी अस्पतालों में ये सब सामान्य सी बात हो गई है । पता नहीं सभीको सरकारी फंड से अपने घर भरने होते हैं ।

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर सही कहा आपने स्वयं स्वार्थ सिद्ध सर्व परी मन का मंत्र बन गया है. इंसानियत दिखावे की रह गयी है पल-पल बदलते मुखौटे हैं.
उत्साहवर्धन हेतु सहृदय आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सही कहा आदरणीय सर आपने मूल्यों का होता पतन पत्तनों मुखी होता समाज विनाश की और अग्रसर हो रहा है सार्थक समीक्षा हेतु सहृदय आभार आपका. आपका आशीर्वाद यों ही बनाये रखे.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सही कहा आदरणीया दीदी जी. सही कहा आपने आज सभी सरकारी अस्पतालों का यही हाल है सभी ने स्वार्थ का लवादा लाद रखा है. स्नेह बनाये रखे
सादर

Sudha devrani ने कहा…

सभी जगह के सरकारी अस्पतालों की यही हालत है
कोटा की समसामयिक घटना पर तीक्ष्ण व्यंग करती लाजवाब रचना।
चूहे-सुअर आवारा पशुओं का दाख़िला,
बिन पर्ची सुनसान रात में हो रहा,
राजनेता सेक रहे,
सियासत की अंगीठी पर हाथ,
सियासत के मूर्त रूप का अच्छा खाका खींचा है आपने...

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दीदी जी सुन्दर समीक्षा हेतु.अपना स्नेह और सानिध्य बनाये रखे.
सादर स्नेह

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (06-01-2020) को 'मौत महज समाचार नहीं हो सकती' (चर्चा अंक 3572) पर भी होगी।

आप भी सादर आमंत्रित हैं…
*****
रवीन्द्र सिंह यादव

दिगंबर नासवा ने कहा…

७३ साल बाद भी देश में ऐसा है ... शर्मनाक है ...
जिस देश के डोक्टर आज पूरे विश्व में डंका बजा रहे हैं ... और अपने ही देश में ... शर्म की बात है ...

https://www.kavibhyankar.blogger.com ने कहा…

किसको दिल का दर्द बताऊ
आंख मे आंसू रोज
गूंगा अंधा बहरा राजा
बच्चे मरते रोज
बेशर्मी का ओढ़ लबादा
उड़ा रहा है मोज

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चामंच पर मेरी रचना को स्थान देने के लिये.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सही कहा आदरणीय आपने.... फिर भी मानव कब मानने वाला है.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आदरणीय
सादर

Jyoti khare ने कहा…

प्रभावी और सच को उजागर करता सृजन

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर