मंगलवार, 3 मार्च 2020

सुख स्वप्न हमारा... नवगीत


 मुक्त पवन का बहता झोंका,  
 कुछ पल का बने सहारा है, 
 निर्मल नीर चाँद की छाया,
ऐसा सुख स्वप्न हमारा है। 

समय सरित बन के बह जाता, 
 रहस्यमयी लहरों में कौन, 
शून्यकाल की सीमा  बैठा,
नीरव पुलिन मर्मान्तक मौन। 

 गहन निशा में जुगनू आभा,
 थाह तम साथी सहारा है,
निर्मल नीर चाँद की छाया,
ऐसा सुख स्वप्न हमारा है। 

धुंध की धूमिल आभा में, 
बांधे बँधन प्रेम विश्वास , 
सहृदय दीप वर्ति साँसों में,
प्रीत ज्योति की अमर है आस। 

तरणि तट मिट्टी के घरौंदे,
सजन बस तेरा सहारा है,
निर्मल नीर चाँद की छाया,
ऐसा सुख स्वप्न हमारा है

©अनीता सैनी 

28 टिप्‍पणियां:

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बहुत सुंदर रचना, अनिता दी।

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 03 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (04-03-2020) को    "रंगारंग होली उत्सव 2020"  (चर्चा अंक-3630)    पर भी होगी। 
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
 --
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

NITU THAKUR ने कहा…

बहुत ही सुंदर 👌👌👌

मन की वीणा ने कहा…

वाह उत्तम सृजन!
प्रिय को समर्पित अहसास और भाव,
सुंदर नव गीत ।
कोमल सरस शब्दावली।

Sudha devrani ने कहा…

वाह!!!
बहुत ही लाजवाब नवगीत अनीता जी
बहुत ही सुन्दर सरस एवं मनभावन...
बहुत बहुत बधाई आपको।

शुभा ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत नवगीत प्रिय सखी अनीता जी ।

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार प्रिय ज्योति बहना
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी संध्या दैनिक में मेरी रचना को स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर चर्चामंच पर मेरी रचना को स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार सखी 🌹

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.
सादर

रेणु ने कहा…

धुंध की धूमिल आभा में,
बांधे बँधन प्रेम विश्वास ,
सहृदय दीप वर्ति साँसों में,
प्रीत ज्योति की अमर है आस।
भावों से भरा नवगीत प्रिय अनीता | अनुप्रास का प्रयोग बहुत सुंदर है | हार्दिक शुभकामनाएं |

Meena Bhardwaj ने कहा…

समय सरित बन के बह जाता,
रहस्यमयी लहरों में कौन,
शून्यकाल की सीमा बैठा,
नीरव पुलिन मर्मान्तक मौन।
बहुत गहन भावोंं से सजा अनुपम नवगीत अनीता जी ।

Kavita Rawat ने कहा…

रणि तट मिट्टी के घरौंदे,
सजन बस तेरा सहारा है,
निर्मल नीर चाँद की छाया,
ऐसा सुख स्वप्न हमारा है।
..बहुत सुन्दर प्रस्तुति

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय रेणु दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय मीना दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

अनुपमा अग्रवाल ने कहा…

बहुत सुन्दर सृजन 👏👏👏👏👌👌👌👌

संजय भास्‍कर ने कहा…

शून्यकाल की सीमा बैठा,
नीरव पुलिन मर्मान्तक मौन।
.........बहुत गहन भावोंं से सजा नवगीत

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

समय सरित बन के बह जाता,
रहस्यमयी लहरों में कौन....
सुंदर कृति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर

Anuradha chauhan ने कहा…

बेहतरीन रचना सखी 👌👌

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया बहना