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मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

प्रेम का दौंगरा था वह



हवा के एक हल्के,
 झोंके संग, 
गगन में उमड़े घने, 
मेघ थे वे, 
छलकी थी निश्छल,
 विवश बूँदें,   
कब कहा मैंने तुम्हारी,
याद थी वह। 

तपते मरुस्थल पर,
 बिखरी थी,  
तुम्हारी स्मृतियों की,
 गठरी थी वह, 
कुछ मुस्कुरायी कुछ, 
 पथराई-सी थीं वे,    
तपन के हाथ में पड़े, 
समय के छाले थे वे। 

माँज रहा था समय,
 दुःख भरे नयनों को,
स्वयं को न माँज पाई, 
एक पल की पीड़ा थी वह,
कल्याण का अंकुर,
उगा था उरभूमि पर,
बिखेर तमन्नाओं का पुँज,
हृदय पर लगी ठेस,
प्रीत ने फैलाया प्रेम का,
दौंगरा था वह।

©अनीता सैनी 

25 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 22 एप्रिल 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीया दीदी संध्या दैनिक में मेरी रचना को स्थान देने हेतु.

      हटाएं
    2. सादर आभार आदरणीया दीदी 🙏

      हटाएं
  2. तपते मरुस्थल पर,
    थी बिखरी,
    तुम्हारी स्मृतियों की,
    गठरी थी वह,
    कुछ मुस्कुरायी कुछ,
    छलकी पथराई आँखें थीं वे,
    तपन के हाथ में पड़े,
    समय के छाले थे वे।
    बहुत शानदार.....

    जवाब देंहटाएं
  3. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (24-04-2020) को "मिलने आना तुम बाबा" (चर्चा अंक-3681) पर भी होगी।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है

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    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीया मीना दीदी चर्चामंच पर मेरी रचना को स्थान देने हेतु.
      सादर

      हटाएं
  4. उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीया दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
      सादर

      हटाएं
  5. माँज रहा था समय,
    दुःख भरे नयनों को,
    स्वयं को न माँज पाई,
    एक पल की पीड़ा थी वह,
    कल्याण का अंकुर,
    उगा था उरभूमि पर,
    बिखेर तमन्नाओं का पुँज,
    हृदय पर लगी ठेस,
    प्रीत ने फैलाया प्रेम का,
    दौंगरा था वह।
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर लाजवाब सृजन।

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    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीया दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
      सादर

      हटाएं
  6. उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीया दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
      सादर

      हटाएं
  7. बहुत सुंदर सृजन।
    भावों का सुंदर गुलदस्ता।

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    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीया कुसुम दीदी सुंदर समीक्षा हेतु. स्नेह आशीर्वाद बनाये रखे.

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