शनिवार, 4 अप्रैल 2020

देश नहीं पहले-सा मेरा



पतित हुआ लोगों का चेहरा, 
देश नहीं पहले-सा मेरा।
--
 सुखद नहीं पेड़ों की छाया,  
सबके मन में माया-माया,
लालच ने सबको है घेरा, 
देश नहीं पहले-सा मेरा।

मन में बहुत निराशा भरते
ओछे यहाँ विचार विचरते 
उजड़ रहा खुशियों का डेरा।
देश नहीं पहले-सा मेरा।

पुतली सिकुड़ी मानवता की,
जीत हो रही दानवता की,
अंधकार का हुआ बसेरा, 
देश नहीं पहले-सा मेरा।

घृणा बसी है घर-आँगन में, 
प्रेम बहिष्कृत हुआ चमन में,
गली में घूमे द्वेष लुटेरा, 
देश नहीं पहले-सा मेरा।

तरु जल को लाचार हो गये,
पैने अत्याचार हो गये,
छाया है अँधियार घनेरा, 
देश नहीं पहले-सा मेरा।

चीत्कार करते हैं दादुर, 
आत्मदाह को मन है आतुर,
दूर-दूर तक नहीं सवेरा, 
देश नहीं पहले-सा मेरा।

चातक कितना है बेचारा,
सूखी है सरिता की धारा,
जीवन आज नहीं है चेरा, 
देश नहीं पहले-सा मेरा।

© अनीता सैनी 

12 टिप्‍पणियां:

मुकेश सैनी ने कहा…

पतित हुआ लोगों का चेहरा,
देश नहीं पहले-सा मेरा।
--
सुखद नहीं पेड़ों की छाया,
सबके मन में माया-माया,
लालच ने सबको है घेरा,
देश नहीं पहले-सा मेरा।

मन में बहुत निराशा भरते
ओछे यहाँ विचार विचरते
उजड़ रहा खुशियों का डेरा।
देश नहीं पहले-सा मेरा।
बहुत सुन्दर अनीता जी लिखते रहिये ••••

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक गीत।

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया सर 🙏.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय

Sheru Solanki ने कहा…

वाह वाह वाह वाह वाह वाह क्या कहने है

रेणु ने कहा…

पतित हुआ लोगों का चेहरा,
देश नहीं पहले-सा मेरा।
--
सुखद नहीं पेड़ों की छाया,
सबके मन में माया-माया,
लालच ने सबको है घेरा,
देश नहीं पहले-सा मेरा।
क्या बात है !!!! देश में फैले विषैले वातावरण को हुबहू शब्दांकित करता सराहनीय सृजन|

Sudha devrani ने कहा…

पुतली सिकुड़ी मानवता की,
जीत हो रही दानवता की,
अंधकार का हुआ बसेरा,
देश नहीं पहले-सा मेरा।
वाह!!!अनीता जी शानदार गीत रचा है आपने
देश के मौजूदा हालातोंं से खिन्न कवि मन उद्वेलित होकर अपने देश की प्रचीन संस्कृति की यादों में रो पड़ा है।
बहुत ही लाजवाब सृजन।

Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सर