गुरुवार, 14 मई 2020

क्षितिज पर नहीं



उदय-अस्त की नियमित क्रीड़ा 
दृश्य निर्मम यथार्थ का।  
झुलसे पत्थर उजड़ी सड़क 
दृश्य प्रज्वलित दोपहरी का।  

देह मानव की भाप बनी 
निशान नहीं पदचाप का। 
खोजी श्वान का स्वाँग गढ़ा  
भ्रमित परपीड़ा संताप की। 

 काल निर्वहन दिवाकर का 
सृष्टि में व्याप्त व्यवधान का। 
दिशाहीन बिखरे जन-जीवन  
दृश्य शोकाकुल शोक दोपहरी का। 

खींप-आक सब सूख रहे 
दौर दयनीय दुनिया का।  
लंबी-चौड़ी विचारपट्टिका 
उकेरे चित्र कलिकाल का। 

सूर्य निकला क्षितिज पर नहीं 
सत्ता-शक्ति के बाज़ार का।  
उड़नखटोला उतरा भारत में 
नहीं समय शोहरत के बखान का।  

©अनीता सैनी 

36 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (15-05-2020) को
    "ढाई आखर में छिपा, दुनियाभर का सार" (चर्चा अंक-3702)
    पर भी होगी। आप भी
    सादर आमंत्रित है ।
    …...
    "मीना भारद्वाज"

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    1. सादर आभार आदरणीया दीदी मंच पर मेरे सृजन को स्थान देने हेतु.
      सादर

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  2. बहुत सुंदर रचना, अनिता दी।

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    1. सादर आभार आदरणीया दीदी उत्साहवर्धन करती समीक्षा हेतु.
      सादर

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सर
      सादर

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  4. बहुत सुंदर रचना अनिता जी

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    1. सादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.
      सादर

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    1. सादर आभार आदरणीया दीदी उत्साहवर्धन करती समीक्षा हेतु.
      सादर

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  6. उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय सर उत्साहवर्धन करती समीक्षा हेतु.
      सादर

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  7. बेहद खूबसूरत रचना 👌

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    1. सादर आभार बहना सुंदर समीक्षा हेतु.
      सादर

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  8. बहुत खूब ,सुंदर सृजन अनीता जी

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    1. सादर आभार कामिनी दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.
      सादर

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  9. बेहद खूबसूरत रचना अनीता जी

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    1. सादर आभार भास्कर भाई उत्साहवर्धन करती समीक्षा हेतु.
      सादर

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    1. सादर आभार आदरणीय सर उत्साहवर्धन करती समीक्षा हेतु.
      सादर

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  11. सुंदर व्यंजना वर्तमान माहौल की जिसमें समाज,प्रकृति और व्यवस्था की दशा के साथ व्यंग्यात्मक लहज़े में हमें संवेदनशील होने का सबक़ भी है।

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    1. सादर आभार आदरणीय सर उत्साहवर्धन करती समीक्षा हेतु.
      सादर

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  12. वाह!सखी अनीता जी ,सुंदर सृजन ।

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    1. सादर आभार आदरणीया शुभा दीदी मनोबल बढ़ाती सुंदर समीक्षा हेतु.
      सादर

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  13. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 18 मई 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सादर आभार आदरणीय दीदी पाँच लिंकों पर मेरे सृजन को स्थान देने हेतु.
      सादर

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  14. सुंदर अभिव्यंजना ।

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    1. सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाती सुंदर समीक्षा हेतु.
      सादर

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  15. सुंदर और सार्थक रचना सखी! बेहद खूबसूरत।

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    1. सादर आभार सुजाता बहन सुंदर समीक्षा हेतु.
      सादर

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  16. सुन्दर प्रस्तुति सार्थक रचना

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    1. सादर आभार आदरणीय रितु दी मनोबल बढ़ाती सुंदर समीक्षा हेतु.
      सादर

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  17. बेहद सराहनीय अभिव्यक्ति अनु।
    समसामयिक परिस्थितियों पर तुम्हारा चिंतन हृदयग्राही है।

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    1. सादर आभार आदरणीया श्वेता दीदी उत्साहवर्धन करती मोहक प्रतिक्रिया के लिए. आपकी टिप्पणी रचना का मान बढ़ाती है.स्नेह आशीर्वाद बनाये रखे.

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  18. देह मानव की भाप बनी
    निशान नहीं पदचाप का।
    खोजी श्वान का स्वाँग गढ़ा
    भ्रमित परपीड़ा संताप की।
    बहुत ही सुन्दर सार्थक समसामयिक सृजन।
    सचमुच ये परिस्थितियाँ कलिकाल का चित्र उकेरती हैं ...बहुत ही हृदयस्पर्शी।

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    1. सादर आभार आदरणीया दीदी मनोबल बढ़ाती सारगर्भित समीक्षा हेतु.
      सादर

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