रविवार, 2 अगस्त 2020

रिक्त हुई समाज से रीत लौट आई है

                                           
बात हृदय पर लगे आघात की है 
शब्दों के भूचाल से उठे  बवंडर की है 
सूखी घास में लगाई जैसे आग की है 
लगानेवाले भी अपने ही किसी ख़ास की है 
किसी का गढ़ा द्वेष 
 किसी के सर मढ़ा जाएगा  
अन्य मुद्दे पिछड़ गए बात एक बात की है 
देखते ही देखते बातों-बातों में 
कितने ही छप्पर जलेंगे
कितने ही घरों की दीवारें ध्वस्त होंगीं 
पराए विचारों का मंथन कर 
 देह पर दाग़ मले जाएँगे 
 अनगिनत प्रश्नों के अंगारों पर  
रिक्त हुई समाज से रीत लौट आएगी 
उसकी रीड़ की हड्डी फिर  गढ़ी जाएगी 
विषकन्या कह पुकारगे औरतों को 
डाकन, चुड़ैल,कुलटा कह कुचली जाएगी।

©अनीता सैनी 'दीप्ति'

22 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा सोमवार(03-08-2020) को "त्योहारों का उल्लास लिए शुभ अष्टम सु-मास यह आया !" (चर्चा अंक-3782) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय मीना दीदी मंच पर स्थान देने हेतु ।
      सादर

      हटाएं
  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 02 अगस्त 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय यशोदा दीदी सांध्य दैनिक में स्थान देने हेतु ।
      सादर

      हटाएं
  3. उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया सर मनोबल बढ़ाने हेतु ।
      सादर

      हटाएं
  4. किसी का गढ़ा द्वेष
    किसी के सर मढ़ा जाएगा
    अन्य मुद्दे पिछड़ गए बात एक बात की है
    बिल्कुल सटीक....
    बस एक बात को पकड़कर उसी पर बहस .....
    बाकी कुछ तो जैसे कही हो ही नहीं रहा
    अपने नजरिये से बदलते हैं दूसरों की नजर
    दिन को रात रात को दिन बताने की कवायद
    बहुत हु लाजवाब समसामयिक सृजन
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय सुधा दीदी सारगर्भित समीक्षा हेतु।
      सादर

      हटाएं
  5. उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय दी।
      सादर

      हटाएं
  6. उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।

      हटाएं
  7. वाह!सुंदर सृजन सखी ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय सुभा दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं
  8. पराए विचारों का मंथन कर
    देह पर दाग़ मले जाएँगे
    अनगिनत प्रश्नों के अंगारों पर
    रिक्त हुई समाज से रीत लौट आएगी ..
    निशब्द करती मर्मस्पर्शी भावाभिव्यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय मीना दी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं
  9. बहुत ही सुंदर सृजन,अनिता दी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय ज्योति बहन मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं
  10. आक्रोशित मन के लावा को शब्दों के माध्यम से व्यक्त करती एवं उसके आंच को महसूस कराती रचना।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय राकेश भाई जी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं

anitasaini.poetry@gmail.com