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रविवार, 21 मार्च 2021

दोहे


 श्याम श्याम राधे कहे

श्याम रंग शृंगार।

श्याम रंग ने ठग लिया

जोगन कह संसार।।


श्याम रंग का लहरिया

स्याह  प्रीत परिधान।

मोह साँवले ने लिया

बने श्याम अभिमान।।


मनमोहन मन में बसे

मन बहोत अनमोल।

मुरलीधर मन को हरे

नहीं प्रीत का मोल।।


छलिया छल की कोठरी 

मायावी है नाम।

कान्हा कान्हा जग कहे

मीरा के हैं श्याम।।


सुख-समृद्धि जग खोजता 

मिला न सुख का छोर।

 जिस मन में कान्हा बसे 

थामे सुख की डोर ।।


@अनीता सैनी 'दीप्ति'

36 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. बहुत अच्छा लगा सर आपकी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
      सादर

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  2. श्याम रंग में रंगे अति सुन्दर दोहे ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय मीना दी।
      सादर

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  3. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार ( 22-03 -2021 ) को पत्थर से करना नहीं, कोई भी फरियाद (चर्चा अंक 4013) पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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    1. सादर आभार आदरणीय सर चर्चामंच पर स्थान देने हेतु।
      सादर

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  4. वाह!प्रिय अनीता ,बहुत खूबसूरत सृजन ।

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    1. दिल से आभार प्रिय शुभा दीदी जी।
      सादर

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  5. कान्हा के दोहों ने सच ही मन मोह लिया ।सुंदर दोहे ।


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    1. दिल से आभार आदरणीय संगीता दी जी।
      सादर

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  6. कान्हा जैसे सुंदर और मनभावन दोहे, आपको हार्दिक शुभकामनाएं ।

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    1. दिल से आभार आदरणीय जिज्ञासा दी जी मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

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  7. बहुत सुंदर और सरल दोहे। सार्धक और बढ़िया सृजन के लिए आपको बधाई।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सर।
      सादर

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  8. दिव्य भावों को प्रगट करती बहुत सुन्दर रचना - - नमन सह।

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    1. आभारी हूँ सर आपकी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
      सादर

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  9. बहुत ही खूबसूरत दोहे, श्याम रंग रंगा रे, मन ये मेरा रे, श्याम रंग में रंगी हुई रचना , बहुत ही प्यारी, शुभ प्रभात अनीता बधाई हो

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    1. आभारी हूँ ज्योति बहन।
      स्नेह यों ही बन रहे।
      सादर

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  10. अति सुन्दर एवं मनभावन ।

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    1. दिल से आभार आदरणीय अमृता दी जी।
      सादर

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  11. कान्हा और होली का ज़िक्र न हो ...
    हर रँग को इन पंक्तियों में कान्हा के संग उतारा है आपने ...
    श्याम रँग लगते ही चित श्याम हो जाता है ...

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    1. सहृदय आभार आदरणीय सर आपकी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
      सादर

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  12. सुख-समृद्धि जग खोजता

    मिला न सुख का छोर।

    जिस मन में कान्हा बसे

    थामे सुख की डोर ।।

    वाह!!!
    कान्हा की लीला और भक्ति से परिपूर्ण लाजवाब दोहे।

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  13. बहुत बहुत सुन्दर दोहे

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anitasaini.poetry@gmail.com