गुरुवार, 24 जनवरी 2019

दमन अवसाद का




                 

          अपने  हिस्से  की  ज़िंदगी, मोहब्बत से गूंथने लगे ,    
             दमन  अवसाद  का,  तृष्णा  को  दबाने  लगे  |
        
            ज़िंदगी  की  दौड़  में,  कृत्रिमता  को  ठुकराने  लगे,
         किया क़दमों को मज़बूत ,अस्तित्त्व अपना बताने लगे |

            इंसान  हैं   हम,  इंसान  से  मोहब्बत  करने  लगे, 
              मशीनों  की  मोहब्बत, दोस्ती   ठुकराने  लगे   |

        तन की  थकान, मन के  अवसाद से  निजात पाने लगे , 
             हृदय    का   जुनून ,    चाहत   में    बुनने   लगे  |

                चाहतों  के   दरमियाँ   दायरे  बनने  लगे  ,
            क्यों  घसीटें  मन  को,  इंसानियत  समझने  लगे   ?

            बच्चों   से  मोहब्बत,  प्रतियोगिता  भुलाने  लगे , 
             बनें  नेक   इंसान, ठुकरेस  ठुकराने   लगे  |

          खा  रहे  इस  नश्ल  को,  वो   कीड़े  दफ़नाने  लगे  ,
           कृत्रिमता  को  ठुकरा,   प्रकृति  को  अपनाने  लगे  |


                                - अनीता 

32 टिप्‍पणियां:

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीय अनुराधा जी
सादर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (26-01-2019) को "गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-3228) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
गणतन्त्र दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय चर्चा में स्थान देने के लिए
सादर

Kamini Sinha ने कहा…

हमेशा की तरह लाजबाब ,स्नेह सखी

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय कामिनी जी - बहुत सा स्नेह सखी
और तहे दिल से आभार आप का
सादर

व्याकुल पथिक ने कहा…

अच्छी बात है

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आदरणीय
सादर

दिगम्बर नासवा ने कहा…

प्राकृति को अपनाने लगे ...
सुंदर संदेश लिए हर शेर ... बहुत लाजवाब लेखन ...

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय दिगम्बर नास्वा जी आप का ब्लॉग पर तहे दिल से स्वागत है बहुत अच्छा लगा आप ब्लॉग पर पधारे .....उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए सह्रदय आभार आप का |
सादर

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत शानदार

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय लोकेश नदीश जी ...आप का ब्लॉग पर स्वागत है |
सादर

Analyser/observer ने कहा…

each word has a true meaning and deep imapact.... Anita Ji behad sundar "shandar"

अनीता सैनी ने कहा…

Thaks sir. Have a good day .

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
२८ जनवरी २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीय श्वेता जी हमक़दम में मुझे स्थान देने के लिए |
सादर

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

बहुत सुन्दर अनीता जी,
आशा, आत्म-विश्वास, कर्मठता और लोक-कल्याण की भावना, अवसाद को पास फटकने भी नहीं देंगे. फिर तो जो भी होगा - सुन्दर होगा, शिव होगा.

Sriram ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय गोपेश जैस्वाल जी आप का ब्लॉग पर तहे दिल से स्वागत है बहुत दिनों बाद आप की प्रतिकिर्या मीली बहुत अच्छा लगा |सही कहा आप ने अवसाद का निवारण सकारात्मकता ही है |बहुत सुन्दर टिप्णी के लिए आप का सह्रदय आभार |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय आप का
सादर

Sudha devrani ने कहा…

तन की थकान और मन के अवसाद को मिटाना ही होगा
कृत्रिमता को छोड़ प्रकृति को अपनाकर जिन्दगी के सत्य को स्वीकार करना होगा....
बहुत ही लाजवाब... सकारात्मक भावों से भरी...
वाह!!!

रवीन्द्र भारद्वाज ने कहा…

बहुत खूब........बेहतरीन सृजन आदरणीया

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीय सुधा जी -बहुत ही अच्छी टिप्णी ,मन को मोह गए आप के शब्द. ..
आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय रविन्द्र जी
सादर

मुकेश सैनी ने कहा…

बहूत ही बेहतरीन रचना।

अनीता सैनी ने कहा…

जी आभार
सादर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (09-10-2019) को    "विजय का पर्व"   (चर्चा अंक- 3483)     पर भी होगी। --
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
 --विजयादशमी कीहार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

Meena Bhardwaj ने कहा…

बेहतरीन और लाजवाब सृजन ।

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

काश कि आपके सुन्दर सपने सच हो जाएँ !

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय फिर चर्चापंच पर स्थान देने के लिये
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी सुन्दर समीक्षा और उत्साहवर्धन हेतु
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय सर बहुत बहुत शुक्रिया आप का बहुत अच्छा लगा आप की सुन्दर समीक्षा पढ़ |
काश मेरे सपनें सच हो मेरी भी यही मनसा है
प्रणाम सर
सादर