रविवार, 24 फ़रवरी 2019

स्मृति


                                                 

                     हृदय में करुण  रागिनी, 
                  साँसें  विचलित कर जाती, 
                        मिटे  माटी  के  लाल, 
               क्यों  सुकून  की नींद आ जाती ?

                हाहाकार गूँज  रहा  कण-कण में,  
                       स्मृति   दौड़  आ  जाती, 
                       वेदना  असीम  हृदय  की, 
                      हवाओं से पैगाम लिखवाती|

                      व्यथा व्योम की सुन मानुष,  
                         दामन  में  दर्द  छुपाती, 
                      जला रही  पद चिह्न सपूत के,  
                     करुणा  के  आँसू  बरसाती|

                  चातक-सी वो करुणार्द्र पुकारें
                     हृदय  को आहत कर जातीं 
                      बेसुध-सी  सुप्त  व्यथाएँ 
                        सिसक-सिसककर 
                    क्षितिज पटल पर सो जाती |

                               - अनीता सैनी 

39 टिप्‍पणियां:

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

चातक सी वो करुणार्द्र पुकारें
ह्रदय को आहत कर जाती
बेसुध सी सुप्त व्यथाएँ
सिसक - सिसक कर
क्षतिज पटल पर सो जाती |
बहुत ही सुंदर देशभक्ति रचना। अनंत शुभकामनाएं ।

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर

मुकेश सैनी ने कहा…

ह्रदय में करुण रागिनी
सांसे विचलित कर जाती
मिटे माटी के लाल
क्यों सुकून की नींद आ जाती ?
बहुत खूब ।

Anuradha chauhan ने कहा…

व्यथा व्योम की सुन मानुस
दामन में दर्द छुपाता
जला रहा पद -चिन्ह पूत के
करुणा के आँसू बरसाता
मर्मस्पर्शी रचना

Sudha devrani ने कहा…

दुखद स्मृतियां हमेशा दर्द ही देंगी.... बहुत ही मार्मिक हृदयस्पर्शी रचना...

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

मिटे माटी के लाल
क्यों सुकून की नींद आ जाती
हृदय स्पर्शी रचना ।

Himkar Shyam ने कहा…

बहुत सुंदर, भावपूर्ण

Meena Bhardwaj ने कहा…

मर्मस्पर्शी और भावपूर्ण सृजन अनीता जी सस्नेह ।

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत ही सुंदर सृजन सखी ,स्नेह

Abhilasha ने कहा…

बेहतरीन रचना सखी

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

जी धन्यवाद आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

विश्वमोहन ने कहा…

बहुत सुंदर।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (25-02-2019) को "आईने तोड़ देने से शक्ले नही बदला करती" (चर्चा अंक-3258) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर मुझे स्थान देने के लिए |
सादर

Kavita Saini ने कहा…

Bhut sunder di

Aman Shrivastav ने कहा…

बहुत अच्छा
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Aman Shrivastav ने कहा…

दोस्तों अगर आप सभी के कंप्यूटर के बारे में जानकरी चाहिए हिंदी में तो आप यहाँ से सीख सकते है
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अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह बहन
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

जी आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार
सादर

रेणु ने कहा…

ह्रदय में करुण रागिनी
सांसे विचलित कर जाती
मिटे माटी के लाल
क्यों सुकून की नींद आ जाती ?
बहुत ही भावपूर्ण मर्मस्पर्शी रचना प्रिय अनीता जी | माटी के लाल मिट कर गौरवशाली इतिहास तो बन जाते हैं पर उनकी कमी कौन पूरी करे ?कितने मन व्यथित हो मायूसी के ताम में खो जाते होंगे | मन में असीम करुना जगाती ये रचना बहुत मार्मिक है सखी |

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी रेणु जी |
आप का ब्लॉग पर तहे दिल से स्वागत है |हमेशा की तरह आज भी आपकी टिप्णी मन को सुकून के क्षण में डूबों गई | ज़ब से होस सभाला है यही अनुभूति आसपास रहती है न चाहते हुए भी शब्दों में झलक जाती है |
आप को बहुत सा स्नेह | आप का साथ बना रहे |
सादर

मुकेश सैनी ने कहा…

व्यथा व्योम की सुन मानुष
दामन में दर्द छुपाता
जला रहा पद -चिन्ह पूत के
करुणा के आँसू बरसाता ......
बहुत सुंदर रचना।

अनीता सैनी ने कहा…

जी सस्नेह आभार
सादर

Jyoti Dehliwal ने कहा…

दिल को छूती बहुत ही सुंदर रचना, अनिता दी।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

मुकेश सैनी ने कहा…

खूब

अनीता सैनी ने कहा…

जी आभार
सादर

Ashish Mishra ने कहा…

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