मंगलवार, 5 फ़रवरी 2019

क्षणिकाएँ


          



                                   || जुनून  ||

                               नाजुक़ हथेली, 
                                सपनों की इमारत,   
                                   जुनून  कहुँ , 
                            मंज़िल को पाने की चाहत |


                                ||   आहट ||

                              दौड़ रही ज़िंदगी, 
                              क़दमों की हुई न  आहट, 
                                कहने को सभी अपने, 
                           अपनेपन की हुई न  सरसराहट |


                                ||   अहाता ||

                          शब्दों  का  मौन   अहाता, 
                             सभी  का  एक  ही  दाम, 
                         सतरंगी  बचपन, धूल  से  सना, 
                              मोहब्बत  का   पैग़ाम |
    

                                   ||   प्रेम ||

                           मूक  सफ़र  का  राही 
                          नज़रों  में मोहब्बत का पैगाम 
                             आशिक़ों  की तपिश में  
                             सुलगता  सुबह - शाम |

                      
                                   || नदी ||

                         हर इंतहान  से  गुज़रती 
                           एकधार  में  अविरल  बहती 
                              सागर चाहत  का लक्ष्य 
                                पाने को मिट जाती |


                                    - अनीता सैनी  
       
        
                 
               

33 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

ये क्षणिकाएं वृहद व्याख्या स्वरूप हैं । बहुत-बहुत सुंदर अर्थपूर्ण लेखन।

Meena Bhardwaj ने कहा…

गागर में सागर ...,सभी क्षणिकाएं लाजवाब हैं अनीता जी ।

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय आप ने रचना की व्याख्या की बहुत ख़ुशी हुई |
सह्रदय आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए |
सादर

Jyoti khare ने कहा…

बहुत सुंदर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल गुरुवार (07-01-2019) को "प्रणय सप्ताह का आरम्भ" (चर्चा अंक-3240) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
पाश्चात्य प्रणय सप्ताह की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत आभार आदरणीय
चर्चा में स्थान देने के लिए |
सादर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल गुरुवार (07-02-2019) को "प्रणय सप्ताह का आरम्भ" (चर्चा अंक-3240) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
पाश्चात्य प्रणय सप्ताह की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Anuradha chauhan ने कहा…

वाह सखी बहुत सुंदर क्षणिकाएं

Abhilasha ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी |
सादर |

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी |
सादर

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर क्षणिकाएं ...

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

Abhilasha ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

सोनू ने कहा…

Bahut hi kam sabdon mein sundar rachna

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

मन की वीणा ने कहा…

गहरी और सार्थक क्षणिकाएं।
वाह।

Sweta sinha ने कहा…

बहुत सुंदर सराहनीय क्षणिकायें है..वाह्ह्ह👌

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीया श्वेता जी |
सादर

Sudha devrani ने कहा…

लाजवाब क्षणिकाएं...
बहुत ही सुन्दर सार्थक सारगर्भित..
वाह!!!

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

सुन्दर सृजन.

अनीता सैनी ने कहा…

हार्दिक आभार आदरणीय आप का
सादर

मुकेश सैनी ने कहा…

बहुत खूब।

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आप का
सादर

संजय भास्‍कर ने कहा…

सुन्दर क्षणिकाएं ...अनीता जी ।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर