सोमवार, 4 मार्च 2019

सत्य का डोलता अस्तित्त्व


                                      
     वक़्त के थपेड़ों से, 
    मन कुछ  डोल-सा गया, 
    बुनियाद पर किया विचार, 
    फिर आज को तौल-सा गया |

    ख़तरे  में  अस्तित्त्व,  
   छूट   रही   पहचान,  
    गर्दिश  चेहरे  पर, 
    खोखला हुआ इनाम |

    झूठ, हिंसा,  भारी  तन पर, 
    रहा,  सत्ता-शक्ति   का  हाथ, 
  राह    चुनी     प्रीत  की, 
   हुई    द्वेष    के   साथ |


    समय   के  सागर  में, 
  निष्ठा  और  आत्मविश्वास, 
   क़दमों  को  गढ़ाये   रखा, 
   साथ   अटूट   विश्वास |

        - अनीता सैनी 

28 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन टीम की और मेरी ओर से आप सब को महाशिवरात्रि पर बधाइयाँ और हार्दिक शुभकामनाएँ |


ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 04/03/2019 की बुलेटिन, " महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर

drindira .blogspot .com ने कहा…

सुन्दर

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…


समय के सागर में
निष्ठा और आत्मविश्वास
क़दमों को गढ़ाए रखा
साथ अटूट विश्वास |
सुंदर लेखन आदरणीया ।

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर रचना सखी

Himkar Shyam ने कहा…

बहुत सुंदर

Kamini Sinha ने कहा…

हमेशा की तरह बहुत खूब ......स्नेह सखी

Unknown ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

Sudha devrani ने कहा…

समय के सागर में
निष्ठा और आत्मविश्वास क़दमों को गढ़ाए रखा
साथ अटूट विश्वास |
बहुत सुन्दर,सार्थक चिन्तनपरक रचना......

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

प्रेरक रचना

deepshikhaaj ने कहा…

सुंदर लेखन सखी।

मन की वीणा ने कहा…

समय के सागर में
निष्ठा और आत्मविश्वास
क़दमों को गढ़ाए रखा
साथ अटूट विश्वास |
अप्रतिम सखी विशेष भाव लिये रचना।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सुक्रिया आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार सखी
स्नेह
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रणाम आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

जी आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार सखी
सादर

संजय भास्‍कर ने कहा…

समय के सागर में
निष्ठा और आत्मविश्वास
क़दमों को गढ़ाए रखा
साथ अटूट विश्वास |
अच्छी रचना...अंतिम पंक्तियाँ तो बहुत ही अच्छी लगीं.

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आदरणीय
सादर

दिगंबर नासवा ने कहा…

विश्वास की डोर हाथ में रहना जरूरी है ... जीवन के लिए ...

अनीता सैनी ने कहा…

जी ठिक कहा आदरणीय आप ने
प्रणाम
आभार
सादर