गुरुवार, 7 मार्च 2019

ख़ामोशी तलाशती है शब्द


                                         

कुछ कहना चाहती है ख़ामोशी, 
ढूँढ़ती हुई भटकती है दर-ब-दर, 
शब्द |
धड़कनों से, 
 आँखों में  झाँ कती  है, 
  जताती है  अस्तित्व, 
की वो भी  है, 
 शब्द |
जड़ता की ख़ामोशी में 
  सिसक रहे शब्द भी 
शब्द हैं |
दामन में सिमटी 
घर के  कोने से झाँकती 
 निःशब्द  ख़ामोशी 
शब्द है |
ख़ामोशी सँजो देती स्वप्न, 
स्वप्न ज़िंदगी, 
ज़िंदगी  शब्द, 
शब्दों में होती ख़्वाहिशें,   
ख़्वाहिशें बन जाती ज़िंदगी,  
ज़िदगी बुनती है, 
शब्द |
पर  यादें  ख़ामोश नहीं 
चीख़तीं  चिल्लातीं  हैं  
न जाने कितने शब्दों  का 
कोहराम है यादें |
वह ख़ामोशी की तरह रेंगती नहीं 
तड़पती नहीं,
 अपनी मौत मरती नहीं  
सिर्फ़   बस  जाती है 
दिल में |
ख़ामोशी शब्द ढूँढ़ती है 
आँखों में तलाशती है परिचय 
हवाओं में ढूँढ़ती 
शब्द |
यादें  झलक जाती है 
दिल से 
 नि:शब्द |

            -   अनीता सैनी 

32 टिप्‍पणियां:

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत उम्दा

Unknown ने कहा…

अति सुन्दर अनीता जी बहुत दिनो बाद आप की रचना आई है

रवीन्द्र भारद्वाज ने कहा…

बहुत खूब.....लाजवाब सृजन

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (09-03-2019) को "जूता चलता देखकर, जनसेवक लाचार" (चर्चा अंक-3268) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Anuradha chauhan ने कहा…

ख़ामोशी शब्द ढूंढ़ती है
आँखों में तलाशती है परिचय
हवाओं में ढूंढ़ती
शब्द |
यादें झलक जाती है
दिल से
निशब्द …………बेहतरीन रचना सखी 👌

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

संजय भास्‍कर ने कहा…

ख़ामोशी शब्द ढूंढ़ती है
आँखों में तलाशती है परिचय
हवाओं में ढूंढ़ती
बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

drindira .blogspot .com ने कहा…

उम्दा लेखन

Onkar ने कहा…

बहुत खूब

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आपका
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रणाम आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीया |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

जी प्रणाम आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रणाम आदरणीय
आभार
सादर

RAKESH KUMAR SRIVASTAVA 'RAHI' ने कहा…

आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है. https://rakeshkirachanay.blogspot.com/2019/03/112.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

अनीता सैनी ने कहा…

प्रणाम आदरणीय
तहे दिल से आभार आप का मित्र मंडली में मुझे स्थान देने के लिए |
आभार
सादर

दिगंबर नासवा ने कहा…

खामोशी खामोश कहाँ रह पाती है ...
मुखर अभिव्यक्ति किसी चीख से भी ज्यादा आवाज़ लिए ...

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ,सखी

Sweta sinha ने कहा…

शब्द का सुंदर आख्यान..बहुत सुंदर रचना अनीता जी..सराहनीय सृजन👌

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीया श्वेता जी
सादर

Sudha devrani ने कहा…

ख़ामोशी सजों देती स्वप्न
स्वप्न जिंदगी
जिंदगी शब्द
शब्दों में होती ख्वाहिशें
ख्वाहिशें बन जाती जिंदगी
वाह!!!!
क्या बात है...बहुत लाजवाब...।

रेणु ने कहा…

पर यादें ख़ामोश नहीं
चीख़ती चिल्लाती है
न जाने कितने शब्दों
यादों पर बहुत ही शानदार चिंतन किया है आपने प्रिय अनीता| सच है यादें मौन रहकर भीतर ही बसी हुई जीवन का सशक्त संबल बन जाती हैं | सस्नेह शुभकामनायें इस भावपूर्ण रचना के लिए |

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय रेणु दी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर