शुक्रवार, 3 मई 2019

निष्ठा से ठन गई



आँखें गढ़ाये  बैठे , निष्ठा  से ठन गयी, 
हौसले का थामा  हाथ, मंज़िल से बात बन गयी |

साँसों  में  सुलगने का उस का इरादा न था,  
इस क़दर मिलेगी  राह  में  किया वादा न था|

लम्हा-दर-लम्हा  निभाई वफ़ा, 
लगा न कभी जिगर  से हुई  परायी |

नाक़ामी की उम्र क्या ,
मुठ्ठीभर रेत हवा के इंतज़ार  की बारी क्यों ?
मंज़िल राह तकेगी, निष्ठा से कालाबाजारी क्यों ?

छोटी-सी ज़िंदगी,
द्वेष का मन पर राज क्यों ?
प्रेम से जियेंगे,अहंकार की अधीन  क्यों ?

गुरूर से धड़कता सीना ,
स्वाभिमान से कलाकारी क्यों ?
आँखों में  तेज़ ,मायूसी की पहरेदारी क्यों  ?

मिलेगी  शौहरत, 
 बढ़ते क़दमों से यारी  क्यों ? 
निकलना हो सफ़र पर दूरी का आँकलन मज़बूरी क्यों ?

- अनीता सैनी 

27 टिप्‍पणियां:

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत शानदार

अमित निश्छल ने कहा…

वाह वाह, बहुत ख़ूब।

मन की वीणा ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति शानदार गहरे उतरती।

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

शुभा ने कहा…

वाह!!सखी ,सुंदर रचना .

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत सुंदर रचना..... ,सादर

अनीता सैनी ने कहा…


जी नमस्ते,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (05-05-2019) को

"माँ कवच की तरह " (चर्चा अंक-3326)
पर भी होगी।

--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
....
अनीता सैनी

Sudha devrani ने कहा…

छोटी सी जिंदगी ,द्वेष का मन पर राज क्यों ?
प्रेम से जियेंगे ,अहंकार की दबवारी क्यों ?
वाह!!!!
बहुत ही सुन्दर.....
लाजवाब।

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

Dr Varsha Singh ने कहा…

अत्यंत रोचक कविता

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
६ मई २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

Meena sharma ने कहा…

छोटी सी जिंदगी ,द्वेष का मन पर राज क्यों ?
प्रेम से जियेंगे ,अहंकार की दबवारी क्यों ?
बहुत सुंदर पंक्तियाँ

Sadhana Vaid ने कहा…

वाह अनीता जी ! अनुपम सृजन !

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी शुभा जी तहे दिल से आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय बहन कामिनी जी तहे दिल से आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी बहुत बहुत आभार आप का
बहुत सा सनेह
आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय सखी आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी श्वेता जी आप का हमक़दम में मुझे स्थान देने के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी मीना जी तहे दिल से आभार बहन
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी सहृदय आभार आप का
सादर

रेणु ने कहा…

आँखें गड़ाए बैठे , निष्ठा से ठन गई
हौसले का थामा हाथ, मंजिल से बात बन गई
प्रिय अनिता तुम्हारी अपनी ही शैली में निष्ठा का ये यशोगान अद्भुत है | हार्दिक शुभकामनायें और मेरा प्यार |

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय रेणु दी
सादर