शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

प्रभात की पहली किरण



 प्रभात  की  पहली  किरण  ने,
कुछ  राज़  वफ़ा  का  सीने  में  यूँ  छिपा  लिया, 
 पहना  हिम्मत  की  पायल  पैरों  में, 
हृदय  में  दीप  विश्वास  का  जला दिया,
और चुपके से कहा !
 घनघोर बादल आकाँक्षा के,
उमड़ेंगे  चित्त पर ,
विचलित करेगी वक़्त की आँधी, 
तुम  इंतज़ार  मेरा   करना |

हम  फिर  मिलेगें  उस राह पर, 
हमदम  बन  हमसफ़र  की तरह,
होगा  सपनों  का आशियाना 
गूँथेंगे  एक  नया  सवेरा |

कुछ खेल क़ुदरत का यूँ रहा ,
तसव्वुर में एक महल यूँ ढ़हा, 
इन बैरी बादलों  ने  छिपाया ,
मासूम मन मोहक मुखड़ा उसका|

नज़र आती थी वह खिड़की में, 
 फिर वहाँ ख़ामोशी का हुआ बसेरा ,
छूकर   फिर  लौट  जाना ,
मेरी मासूम मुस्कुराहट पर,
मुस्कुराते  हुए  लौट आना |

कुछ पल ठहर उलझा उलझन भरी बातों में, 
फिर लौट आने की उम्मीद थमा हाथों में,
धीरे-धीरे बादलों के उस छोर पर बिखर,
फिर सिसकते हुए  सिमट जाना, 
मेरे चकोर-से चित्त को यूँ समझाते हुए जाना |

- अनीता सैनी 

18 टिप्‍पणियां:

Meena Bhardwaj ने कहा…

खूबसूरती से भावों को शब्दों में पिरोया है ...बहुत सुन्दर सृजन !

Kailash Sharma ने कहा…

मनभावन भावों का खूबसूरत चित्रण।

आनन्द शेखावत ने कहा…

अति सुंदर, अनिता दी

deepshikhaaj ने कहा…

अति सुंदर रचना सखी।

उर्मिला सिंह ने कहा…

अप्रतिम रचना बहन।

Subodh Sinha ने कहा…

"पहना हिम्मत की पायल पैरों में ,
हृदय में दीप विश्वास का जला दिया,"
बहुत प्यारे बिम्ब हैं। आप अतुलनीय लिखीं हैं।

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

प्रकृति का सानिध्य कल्पनालोक में अदभुत रंग भरता है. बिम्बों और प्रतीकों में निहित अंतरकथा मर्मस्पर्शी है. ऐसी रचनाओं का सृजन प्रकृति के सुकुमार कवि पंत का अनायास स्मरण कराता है.
लिखते रहिए.
बधाई एवं शुभकामनाएँ.

Anuradha chauhan ने कहा…

हम फिर मिलेगें उस राह पर,
हमदम बन हमसफ़र की तरह,
होगा सपनों का आशियाना
गूँथेंगे एक नया सवेरा |बेहद खूबसूरत रचना सखी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (13-08-2019) को "खोया हुआ बसन्त" (चर्चा अंक- 3426) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार दी उत्साहवर्धन समीक्षा के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार अनुज
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार दी जी |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय उत्साहवर्धन समीक्षा के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय शब्द नहीं है किन शब्दों में आप की समीक्षा की समीक्षा करूँ. . |
आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए
सादर