बुधवार, 9 अक्तूबर 2019

प्रबल प्रेम का पावन रुप



थाईलैंड का  एक हिस्सा  
खाओ याई नेशनल पार्क  
बहता है वहाँ एक झरना नरक का 
स्थानीय लोगों ने दिया यह नाम  
 निगल रहा है वह 
 ज़िंदगियाँ मासूम हाथियों की 
सिहर उठा मन देख ज़िंदगी की जंग
नन्हें नाज़ुक हाथी के बच्चे की 
आह से आहतित 
आवाज़ में मर्म ममता का लिये  
 टपकते आँसू पाकीज़ा नन्हीं  आँखों से  
ठहर गयीं धड़कनें बिखर गयीं साँसें 
कूद पड़े प्रबल प्रेम के प्रतापी 
परिवार के सात अन्य हाथी 
अर्पित की सभी ने साँसें अपनी 
बचाने अपना एक नन्हा प्यारा साथी 
प्रखर प्रेम को सजोये सीने में  
सदियों से सहेजते और समझाते आये  
सबल समर्पण साँसों में लिये 
मसृण रस्सी से जीवनपर्यन्त बँधे आये   
अंतरमन को उनके 
उलीचती सृष्टि स्नेह की स्निग्ध धार से 
प्रेम के वाहक कहलाये 
करुणा के कोमल कलेवर कुँज के 
कृपाधार रहे ममता के
वशीभूत सस्नेह के गजराज 
दुरुस्त दिमाग़ के नहीं है दावेदार
कहलाये कोमल मन,विशाल तन
माँ के प्रथममेश्वर पहरेदार 
 पावन प्रेम से पल्लवित स्वरुप  
शाँत चित्त 
मानव मित्रता के सच्चे हक़दार 
 कविता कही न गढ़ी कल्पना 
मुखर हुआ यथार्थ के  मंथन से 
 प्रबल प्रेम का पावन रुप |

© अनीता सैनी 

34 टिप्‍पणियां:

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

even i read that article and being an Environmentalist by profession it gives me a chill down the spine.

hmm..jaane kab rukenge hum Nature yun barbad krne se

bahut hi sarthak aur prkriti ki aur aapki swdansheelta darshaati rchna
bdhaayi

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (11-10-2019) को   "सुहानी न फिर चाँदनी रात होती"  (चर्चा अंक- 3485)     पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।  
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ 
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

सार्थक सृजन जो पशुप्रेम की दर्दनाक दास्तान का दर्दभरा दरिया समेटे है.
रचना में समाहित घटना रूह कंपा देनेवाली है जिसमें प्रेम का समर्पित रूप बड़ी ही संजीदगी से उभरा है.
प्रकृति की कोख में पलते चैतन्य क्षितिज पर जीवन के रंग अपनी सौन्दर्यमयी आभा बिखेरते हुए सृष्टि को नया अर्थ प्रदान करते हैं.
सुंदर सृजन की बधाई.
लिखते रहिए.

Jyoti Dehliwal ने कहा…

इस बात की मुझे जानकारी नहीं थी। बहुत ही दर्दनाक दास्तान। उसमें आपने जिस तरह से घटना का वर्णन किया व्व बहुत ही काबिले तारीफ़ हैं, अनिता दी।

विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा…

मानव समझ पाने में अक्षम हो रहे हैं प्यार स्नेह सम्मान की बातों.
जीवंत चित्रन के लिए साधुवाद और शुभकामनाओं के संग सस्नेहाशीष

Meena Bhardwaj ने कहा…

जीवन्तता लिए सार्थक सृजन । आपकी लेखनी की धार यूं ही विविध विषयों पर चलती रहे । अनन्त शुभकामनाएँ...

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत उम्दा अभिव्यक्ति

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 11 अक्टूबर 2019 को साझा की गयी है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Kamini Sinha ने कहा…

इस मार्मिक घटना को आँखों के आगे जीवंत कर गई आपकी रचना ,सादर

Neeraj Kumar ने कहा…

कारुणिक अभिव्यक्ति!

Anuradha chauhan ने कहा…

बेहद हृदयस्पर्शी रचना सखी 👌

Sweta sinha ने कहा…


जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
१४ अक्टूबर २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।,

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

मन की वीणा ने कहा…

प्रेम का ये रूप विरला ही देखने को मिलता है, एक सच्ची घटना को आपने ऐसे चित्रित किया है जैसे सामने घट रही हो, मन द्रवित हो गया।
बहुत लाजवाब संवेदनाओं को जगाती सार्थक रचना।

SUJATA PRIYE ने कहा…

अंतर्मन को उनके
उलीचती सृष्टि स्नेह की स्निग्ध धार से
प्रेम के वाहक कहलाए।
बहुत ही सुंदर सटीक एवं सार्थक पंक्तियाँ अनीता बहन! सादर।

Meena sharma ने कहा…

प्रेम का यह रूप तो मूक पशुओं में ही देखने को मिल सकता है। मनुष्य में ऐसे उदाहरण बहुत कम हैं। बहुत मर्मस्पर्शी चित्रण।

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

सुन्दर रचना। आपकी इस रचना में एक कवि मन की पैनी नजर की स्पष्ट झलक मिलती है। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया ।

अनीता सैनी ने कहा…

Thanks dear.

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चामंच पर स्थान देने हेतु |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…


आभार आदरणीय रवीन्द्र जी सुन्दर समीक्षा और रचना को प्रवाह प्रदान करने हेतु |आपकी समीक्षा हमेशा मेरा मार्गदर्शन करती है आप का आशीर्वाद हमेशा यूँ ही बना रहे |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार प्रिय ज्योति बहना सार्थक समीक्षा और अपार स्नेह हेतु |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर नमन आदरणीया दी जी |
इस घटना ने मुझे भी अंदर तक हिलाकर रख दिया था.आपकी समीक्षा हमेशा और बेहतर लिखने की प्रेरणा प्रदान करती है.आप का आशीर्वाद हमेशा यूँ ही बना रहे.
एक बार पुनः आभार आप का |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आदरणीय मीना दी मेरा मनोबल बढ़ाने हेतु.आप के स्नेह का मुझे संबल प्रदान करता है.
सादर स्नेह आभार

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय लोकेश जी सुन्दर समीक्षा हेतु. प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय रवीन्द्र जी मेरी रचना को मुखरित मौन में स्थान देने हेतु.
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आपकी आभारी हुँ आदरणीया कामिनी दी.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आपकी आभारी हूँ आदरणीय नीरज जी सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीया अनुराधा दी जी.
सदैव आभारी रहूँगी आपकी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीया श्वेता दी सहृदय आभार आपका हमक़दम में मुझे स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत आभारी हूँ आदरणीया सुजाता बहन सुन्दर समीक्षा हेतु
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीया मीना जी रचना के मर्म को समझने और सार्थक समीक्षा हेतु आप का बहुत बहुत आभार आप का सानिध्य हमेशा बना रहे.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर नमन आदरणीय पुरुषोत्तम जी.बहुत आभारी हूँ आप की सुन्दर समीक्षा और अमूल्य सम्मान की. आप का सानिध्य और आशीर्वाद हमेशा बना रहे.
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया कुसुम दी जी ।
आपकी सारगर्भित प्रतिक्रिया ने रचना का मर्म स्पष्ट करते हुए उसे और अधिक प्रभावी बना दिया है।
आपका स्नेह और आशीर्वाद सदैव अपेक्षित है।
आभार सादर।