रविवार, 8 दिसंबर 2019

सुनो प्रिये !



सुनो प्रिये !
तुम यों ही मुस्कुराते रहना 
बन्धुत्त्व का गान 
  गुनगुनाते रहना तुम अहर्निश 
 मिटाना न मन की सादगी 
चमन में बहार बन खिलखिलाते रहना 
प्रेम दीप हृदय में 
ढलती साँझ तुम यों ही जलाते रहना, 

जला 
जीवन में ज्योति  प्रीत की 
मैं अंतिम 
साँस तक धधकूँगी 
निर्वहन
 करुँगी दायित्व तुम्हारे 
कुंठित समाज की कुंठा सहूँगी 
शब्द-बाण से न आहत 
अपने मन को करुँगी
अडिग रहूँगी   
 ताड़ के पेड़-सी 
वह स्वाभिमान है मेरा 
तुम 
ग़ुरुर का ग़ुबार न समझना, 

सुनो प्रिये !
तुम समझ से न समझाना
 बुद्धि को अपनी 
तुम नासमझ रहना 
बदल रही है हवा देश की 
तुम सीने पर 
फ़सल राजनीति की 
न लहराना,  

जब याद
 सताये अपनों की  
तुम वही 
प्रीत पहन लौट आना 
खटकाना चौखट 
ख़ामोशी से 
हड़बड़ाहट न दहलीज़ पर दर्शाना 
खोयी  हैं  फ़ज़ाएँ स्वप्न में  
निशा को नींद से तुम न जगाना, 

सुनो प्रिये !
तुम विचलित मन न करना 
जल रहा  है 
  द्वेष में हृदय जनमानस का 
रोष  टपक रहा है आँखों से 
पड़े है ज़ुबा पर  
छाले तमाम ख़्वाहिशों के
तुम प्रीत की बातें न करना 
 ढो न पाओगे स्वार्थ का लवादा  
सुनो प्रिये !
तुम ख़ुद से ख़ुद की बातें करना |

©अनीता सैनी 

22 टिप्‍पणियां:

Anuradha chauhan ने कहा…

बेहतरीन रचना सखी 👌👌

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 08 दिसम्बर 2019 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण रचना ,सादर स्नेह

Nitish Tiwary ने कहा…

वाह! खूबसूरत प्रेम से परिपूर्ण कविता।

मन की वीणा ने कहा…

वाह! उच्चतम भावों का सुंदर काव्य, जहां समर्पण और विश्वास का सुंदर संगम है प्रिय के लिए ,अनुगूंज है प्रभात फेरी सी एक हृदय से दूसरे हृदय तक।
अनुपम, अभिनव , अभिराम।

लोकेश नदीश ने कहा…

अहा! बहुत शानदार

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार बहना
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीया दीदी जी मेरी रचना को मुखरित मौन पर स्थान देने के लिये.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीया कामिनी दीदी जी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया सर
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया दी जी मेरी कृति को सुन्दर समीक्षा से नवाज़ने हेतु. निशब्द रह जाती हूँ आपका अपार स्नेह देख.
सादर

Sudha devrani ने कहा…

जब याद
सताये अपनों की
तुम वही
प्रीत पहन लौट आना
खटकाना चौखट
ख़ामोशी से
हड़बड़ाहट न दहलीज़ पर दर्शाना
खोयी हैं फ़ज़ाएँ स्वप्न में
निशा को नींद से तुम न जगाना,
बहुत ही सुन्दर... बहुत ही लाजवाब
वाह!!!

Meena Bhardwaj ने कहा…

शब्द-बाण से न आहत
अपने मन को करुँगी
अडिग रहूँगी
ताड़ के पेड़-सी
वह स्वाभिमान है मेरा
तुम
ग़ुरुर का ग़ुबार न समझना,
वाह ! लाजवाब...,स्वाभिमान की बात यूं बयां करना..,बहुत सुन्दर लगा ।

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (09-12-2019) को "नारी-सम्मान पर डाका ?"(चर्चा अंक-3544) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित हैं…
*****
रवीन्द्र सिंह यादव

मनेश मीणा ने कहा…

बहुत शानदार Free Song Lyrics

मुकेश सैनी ने कहा…

सुनो प्रिये !
तुम यों ही मुस्कुराते रहना
बन्धुत्त्व का गान
गुनगुनाते रहना तुम अहर्निश
मिटाना न मन की सादगी
चमन में बहार बन खिलखिलाते रहना
प्रेम दीप हृदय में
ढलती साँझ तुम यों ही जलाते रहना,

बहुत सुन्दर..... |

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आपका
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चामंच पर मेरी रचना को स्थान देने के लिये.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया मीना दीदी जी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया सुधा दीदी जी सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर