रविवार, 26 जुलाई 2020

माटी के लाल


सैनिकों की प्रीत को परिमाण में न तोलना 
वे प्राणरुपी पुष्प देश को हैं सौंपतें।
स्वप्न नहीं देखतीं उनकी कोमल आँखें 
नींद की आहूति जीवन अग्नि में हैं झोंकते।

ऐंठन की शोथ सताती,चेतना गति करती।
ख़तरे के शंख उनके कानों में भी हैं बजते।
फिर भी दहलीज़ की पुकार अनसुनी कर 
दुराशा मिटाने को दर्द भरी घुटन हैं पीते।

वे गिलहरी-से कोटरों से नहीं झाँकतें 
नहीं तलाशते कंबल में संबल शीश पर आसमान लिए।
द्वेष की दुर्गंध से दूर मानवता महकाते 
ऐसे माटी के लाल मनमोही मन में हैं रम जाते।

©अनीता सैनी 'दीप्ति'

26 टिप्‍पणियां:

  1. माटी के लाल..देश की सेना के ज़ाबाजों के शौर्य के सम्मान में अनुपम सृजन । कारगिल विजय दिवस पर माँ भारती के वीर सपूतों को नमन ।

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    1. आभारी हूँ आदरणीय मीना दी आपकी हमेशा ही आप मेरा मनोबल बढ़ाती हैं आपकी प्रतिक्रिया मेरा संबल है स्नेह आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

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  2. सैनिक कर्म को नमन करती भावपूर्ण रचना प्रिय अनीता| वीर जवानों की प्रशस्ति में जो लिखा जाए थोड़ा है | कारगिल विजय पर प्राणोत्सर्ग करने वाली हुतात्माओं को सादर नमन | जय हिन्द !!!!!!!!!

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    1. सादर आभार आदरणीय रेणु दीदी सारगर्भित प्रतिक्रिया हेतु।
      संबल मिला आपके आने से स्नेह आशीर्वाद बनाए रखे ।
      सादर

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  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 27 जुलाई 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सादर आभार आदरणीय संध्या दैनिक में स्थान देने हेतु।
      सादर

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  4. कारगिल विजय दिवस पर देश के बहादुर जाँबाज़ सैनिकों को समर्पित रचना सैनिक की विस्तृत सोच को दर्शाती है।

    सैनकों का अकल्पनीय कठिनाइयों से भरा जीवन सदैव स्तुत्य है।

    शहीदों का स्मरण करते हुए शत-शत नमन।


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    1. सादर आभार आदरणीय मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

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  5. फिर भी दहलीज़ की पुकार अनसुनी कर
    दुराशा मिटाने को दर्द भरी घुटन हैं पीते।... देश के सपूतों के ल‍िए इससे अच्छी भावाव्यक्त‍ि नहीं हो सकती..अनीता जी

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    1. सादर आभार आदरणीय अलकनंदा दीदी मनोबल बढ़ने हेतु।
      सादर

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  6. कारगिल विजय दिवस पर रची गयी सुन्दर व सार्थक प्रस्तुति।

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    1. सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु ।
      सादर

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  7. शहीदों को शत शत नमन जय जवान जय हिन्द की सेना

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  8. सादर नमस्कार,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा मंगलवार (२८-७-२०२०) को
    "माटी के लाल" (चर्चा अंक 3776)
    पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है

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    1. सादर आभार दी चर्चामंच पर स्थान देने हेतु ।
      सादर

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  9. सैनिकों की प्रीत को परिमाण में न तोलना
    वे प्राणरुपी पुष्प देश को हैं सौंपतें।
    स्वप्न नहीं देखतीं उनकी कोमल आँखें
    नींद की आहूति जीवन अग्नि में हैं झोंकते।
    वीर सपूतों को समर्पित बहुत सुंदर रचना सखी। शहीदों के चरणों में शत् शत् नमन 🙏

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    1. सादर आभार आदरणीय अनुराधा दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

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  10. कारगिल विजय दिवस पर सुन्दर कविता

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    1. सादर आभार आदरणीय...ब्लॉक पर आप का स्वागत है ।
      सादर

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  11. हमेशा की तरह बेहतरीन

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    1. सादर आभार अनुज मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

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  12. आदरणीया अनीता जी, नमस्ते ! आपने कारगिल विजय दिवस पर सेनानियों के बलिदान को अपनी कविता द्वारा नई ऊंचाइयां प्रदान की है। बहुत भावुक कर देने वाली रचना ! --ब्रजेन्द्र नाथ

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    1. आभारी हूँ आदरणीय आपकी प्रतिक्रिया मिली।
      बहुत बहुत शुक्रिया ।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

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  13. कारगिल विजय दिवस पर सेनानियों के बलिदान पर लिखी हुई भावपूर्ण बेहतरीन रचना अनिता जी।

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    1. सादर आभार आदरणीय दी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

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