शुक्रवार, 14 मई 2021

आज उदास क्यों है कविता


 धूसर रंग की ओढ़नी ओढ़े 

आज उदास है क्यों कविता?


इतनी उदास 

कि खिलखिलाहट 

ओढ़ने की लालसा में लिपटी 

जतन की भट्टी में 

स्वयं को तपाती है कविता।।

 

मन के किवाड़ों पर

अवसाद की कुंडी के सहारे 

जड़ा है साँकल से मौन!

शिथिल काया की विवशता 

सूनेपन को समीप बैठा  

लाड़ लड़ाती है कविता।।


बादलों के कोलाहल में

खालीपन है दिखावे का

परायेपन की नमी देख 

दामिनी सी हँसी 

खूँटी पर  टँगाऐ 

बैठी है कविता ।।


@अनीता सैनी 'दीप्ति'

 

20 टिप्‍पणियां:

  1. मन की साँकले खोल दो, मौन तौड़ दो, कल्पक तो जिंदा ही कविता के सहारे रहता है, न उदास होने दो मन को तो कविता भी हंसेगी खिलखिलायेगी , हां मुझे विश्वास है एक दिन और जल्दी ही उदासियों की परछाइयों से निकल कविता मुस्कुराएगी।
    कुछ थकी सी लेखनी,पर सुंदर सृजन ।
    सस्नेह! जतन की भट्टी नहीं जलानी जतन की फूलवारी लगानी है ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. दिल से आभार आदरणीय दी।
      स्नेह आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं
  2. उम्मीद है उदासी जल्द खत्म होगी।

    जवाब देंहटाएं
  3. इस भयावह माहोल में जब मन ही उदासीन है तो कविता भी उदास ही होगी न...
    बहुत ही संवेदनशील भावपूर्ण सृजन।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा आपने दी।
      स्नेह बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं
  4. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शनिवार (15-05-2021 ) को 'मंजिल सभी को है चलने से मिलती' (चर्चा अंक-4068) पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

    जवाब देंहटाएं
  5. चारों ओर छाए घने अन्धकार, भयावह ख़बरों से आज यह निराश हताश जरूर है ! पर जल्द ही इसकी खुशहाली लौटेगी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया सर।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं
  6. जीवन की बगिया महकेगी और कविता भी खिलखिलाएगी।बस कुछ दिन की उदासी है यह बदली भी छट जाएगी। बहुत सुंदर रचना सखी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आभारी हूँ सखी।
      स्नेह बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं
  7. धूसर रंग की ओढ़नी ओढ़े
    आज उदास है क्यों कविता?

    संवेदनशील सृजनात्मकता ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आभारी हूँ आदरणीय मीना दी।
      स्नेह आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं
  8. छलकते दर्द की कटु अनुभूति का सुंदर प्रकटीकरण। हार्दिक शुभकामनाएं अनीता सैनी जी। ।।।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आभारी हूँ सर।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं
  9. जो सवाल आपने पूछा है अनीता जी, उसका जवाब आपको भी मालूम है और हम सबको भी। कविता तो माहौल से ही जन्म लेती है। माहौल उदास है तो कविता कैसे मुसकराए?

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा आपने आदरणीय सर।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं
  10. उत्तर
    1. दिल से आभार आदरणीय दी।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं

anitasaini.poetry@gmail.com