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शुक्रवार, 9 जुलाई 2021

रुठ्या सावण भादो


बदरी गरजी मेह न बरसो 

घाम घूमतो फिरे गली 

तेज़ ताप-स्यूँ तपती छाया 

जिवड़ो जोवे छाँव भली।।


रीत प्रीत रा झूलस्या पग

आभे ज्वाला बरस रही 

बेला बूटा बाजर सुख्या

मूँग-मोठ ने चैन नही 

पावस बाट जोवता हलधर

कठ रुठ्यो तू इंद्र बली।।


तारा ढलती रात रोवती

मरु धरा री धधके गोद 

सूनी काया उड़ती माट्टी 

पाखी पाणी खोज्य होद 

ताल-तलैया रित्या पोखर

नीर वाहिनी रूठ चली।।


हूँक हुँकारे पपयो पी की 

कोयल मीठा बोल्य बोल 

नाचे पंख पसार मोरनी

सावण भादु है अनमोल 

बादल बदले वेश घनेरा

सब के मन में आस पली।।


@अनीता सैनी  'दीप्ति'

28 टिप्‍पणियां:

  1. वर्तमान की पीड़ा को दर्शाती सुन्दर कविता !

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  2. उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सर।
      सादर

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  3. ग्रीष्मकालीन परिदृश्य को उकेरता सावन-भादौ की बरसात की प्रतीक्षा करते जीव जगत के मनोभावों को उकेरता भावसिक्त सृजन
    अनीता जी ।बहुत बहुत बधाई आपको सुन्दर सृजन हेतु ।

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    1. आभारी हूँ आदरणीय मीना दी जी सारगर्भित प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर नमस्कार।

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  4. हूँक हुँकारे पपयो पी की

    कोयल मीठा बोल्य बोल्य

    नाचे पंख पसार मोरनी

    सावण भादु है अनमोल

    बादल बदले वेश घनेरा

    सब के मन में आस पली।।.. समझते समझते पूरी रचना समझ गई,सावन का बहुत सुंदर भावपूर्ण वर्णन,अनीता जी, आपको मेरी बहुत शुभकामनाएं।

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    1. आभारी हूँ आदरणीय जिज्ञासा दी जी उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया से सृजन को प्रवाह मिला।
      सादर

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  5. आपकी राजस्थानी भाषा में रचित काव्य रचनाएं अद्भुत होती हैं अनीता जी। हृदय विजित कर लेने वाला गीत है यह्।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आभारी हूँ आदरणीय सर आपकी प्रतिक्रिया हमेशा मुझे संबल प्रदान करती है।
      सादर

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  6. सावन का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है आपने अनिता।

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    1. आभारी हूँ आदरणीय ज्योति दी मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

      हटाएं
  7. बालकवि बैरागी जैसे सुन्दर राजस्थानी गीत लिखती हो तुम अनीता.
    फ़िल्म 'रेशमा और शेरा' का गीत -
    'तू चंदा मैं चांदनी, तू तरुवर मैं पाख रे ---'
    याद आ गया.

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    1. निशब्द रह जाती हूँ सर आपका आशीर्वाद मिला।
      आपकी प्रतिक्रिया से सबल मिला।
      सादर

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  8. आशान्वित हैं सावन बरसेगा ज़रूर !!सुंदर रचना बधाई एवं शुभकामनायें !!

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    1. आभारी हूँ आदरणीय अनुपमा जी प्रतिक्रिया से उत्साह मिला।
      सादर आभार

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  9. वाह!प्रिय अनीता ,बहुत सुंदर 👌

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    1. आभारी हूँ प्रिय शुभा दी जी।
      आपका स्नेह आशीर्वाद यों ही बना रहे।
      सादर

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  10. तपती मरुधरा पर बादल आँख मिचौली करते हैं,
    आते हैं बरसते नही,तपन से व्याकुल जीव जंतु और बरसात के आगमन की प्रतीक्षा प्यास बन जाती है।
    वाह! बहुत बहुत सुंदर हृदय स्पर्शी अलंकारों से सुशोभित सुंदर शब्द चित्र।
    बादली ऐ म्हारी बैनड़ी आय बरस म्हारे देश।

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    1. आपका ममतामयी रुप आँखों में बन गया।शब्दों में अपार स्नेह संबल प्रदान करता है यों ही स्नेह आशीर्वाद बनाए रखे। आज थारी सुन ली बदरी बरसी जयपुर में।
      आपके लिए कुछ लिखा है अवश्य पढ़े 🙏
      https://www.gungigudiya.com/2021/07/blog-post_11.html?m=1

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  11. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 15-07-2021को चर्चा – 4,126 में दिया गया है।
    आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद सहित
    दिलबागसिंह विर्क

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया सर चर्चामंच पर स्थान देने हेतु।
      सादर

      हटाएं
  12. उत्तर
    1. दिल से आभार आदरणीया अमृता दी जी।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं

anitasaini.poetry@gmail.com