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बुधवार, नवंबर 10

मन विरहण



कोरा कागज पढ़ मन विरहण 
टेर मोरनी गावे है।
राह निहार लणीहारा री
कागा हाल सुनावे है।।

सुपण रो जंजाळ है बिखरो 
आली-सीळी भोर बिछी। 
सूरज सर पर पगड़ी बांध्या 
 किरण्या देखे है तिरछी।
 फूल-फूल पर रंग बरसाव 
  बगवा बाग सजावे है।

भाव बादली काळी-पीळी 
बूँदा सरिख्या पल बीत्या।
आँधी जैयां ओल्यूँ उमड़े
हाथ साथ का है रीत्या।
सूरत थळियाँ माही निरखे 
लाली पैर रचावे है।

काग फिरे मुंडेर मापतो  
मनड़े ऊपर खोंच करे।
आख्या पाणी झर-झर जावे 
टेढ़ी-मेडी चोंच करे।
पातल पर खुर्चन धर लाई
काला काग जिमावे है।

@अनीता सैनी 'दीप्ति'

शब्द =अर्थ
 
टेर =पुकार, ऊँचा स्वर
कागा =कौवा 
हाल =संदेश 
सुपणे =स्वप्न 
जंजाळ =झंझट, उलझन 
आली-सिली =भीगी-भीगी-सी 
किरण्या = किरण, रश्मियाँ  
काळी-पीळी =काली-पीली 
सरिख्या =जैसा 
बीत्या =बीता हुआ समय  
ओल्यूँ =याद 
ळियाँ=चौखट 
रीत्या =खाली 
मापतो =मापना 
खोंच =झोली 
खुर्चन=किसी चीज का बचा-खुचा अंश 

34 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" गुरुवार 11 नवम्बर 2021 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आभारी हूँ आदरणीय यशोदा दी जी पांच लिंको पर स्थान देने हेतु।
      सादर

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  2. उत्तर
    1. आभारी हूँ आदरणीय विभा दी जी।
      आशीर्वाद बनाए रखें।
      सादर प्रणाम

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  3. वाह!प्रिय सखी अनीता ,बहुत खूबसूरत सृजन ।

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    1. आभारी हूँ दी जी आपकी प्रतिक्रिया मेरा संबल है।
      आशीर्वाद बनाए रखें।
      सादर

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  4. उम्दा अभिव्यक्ति

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    1. आभारी हूँ आदरणीय प्रीती दी जी।
      सादर

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  5. उत्तर
    1. आभारी हूँ आदरणीय जोशी जी सर मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

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  6. आपके राजस्थानी नवगीतों में मरूभूमि की आत्मा बसती है ।

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    1. आभारी हूँ आदरणीय मीना दी जी आपका स्नेह आशीष संबल है मेरा।
      सादर

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  7. सुंदर मनभावन अभिव्यक्ति
    हार्दिक बधाई

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  8. बहुत सुंदर और सार्थक रचना|
    शब्द चयन बहुत उत्तम है|

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  9. वाह! वाह! राजस्थानी मिट्टी की सुगंध से भरे हुए भाव, कितने सरल होकर भी मनमोहक, हृदयस्पर्शी! राजस्थानी भाषा-भाषियों के लिए तो यह गीत एक अनमोल उपहार है। इसे तो संगीतबद्ध करके गाया जाना चाहिए।

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    1. आभारी हूँ आदरणीय जीतेन्द्र जी सर आपकी प्रतिक्रिया मेरे गीत को और निखार देती है।
      मेरे पास आवाज़ नहीं है काश कोई स्वर दे मुझे भी अत्यंत हर्ष होगा।
      सादर नमस्कार

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  10. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 13.11.21 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा|
    धन्यवाद

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    उत्तर
    1. आभारी हूँ आदरणीय दिलबागसिंह जी सर चर्चमंच पर स्थान देने हेतु।
      सादर

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  11. कोरा कागज पढ़ मन विरहण
    टेर मोरनी गावे है।
    राह निहार लणीहारा री
    कागा हाल सुनावे है।।
    बहुत ही सुन्दर... लयबद्ध....
    लाजवाब गीत।

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  12. अभिनव!अभिराम राजस्थानी भाषा में मोहक नवगीत।
    विरह श्रृंगार का सुंदरतम सृजन ।
    शब्द और भाव दोनों ही बहुत सुंदर ।
    सस्नेह बधाई,इतने सुंदर नवगीत के लिए।

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    उत्तर
    1. आभारी हूँ आदरणीय कुसुम दी जी अत्यंत हर्ष हुआ आपकी प्रतिक्रिया मिली। स्नेह आशीर्वाद बनाए रखें।
      सादर

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  13. उत्तर
    1. आभारी हूँ आदरणीय सर आपकी प्रतिक्रिया संबल है मेरा।
      आशीर्वाद बनाए रखें।
      सादर

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  14. बहुत बहुत बढ़िया, भावपूर्ण चित्रण करती सुंदर रचना ।

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया दी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

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