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गुरुवार, 24 जनवरी 2019

दमन अवसाद का


        


                 

          अपने  हिस्से  की  जिंदगी, मोहब्बत से गूंथने लगे ,    
             दमन  अवसाद  का,  तृष्णा  को  दबाने  लगे  |
        
            जिंदगी  की  दौड़  में,  कृत्रिमता  को  ठुकराने  लगे,
         किया क़दमों को मजबूत ,अस्तित्व अपना बताने लगे |

            इंसान  है  हम,   इंसान  से  मोहब्बत  करने  लगे, 
              मशीनों  की  मोहब्बत,  दोस्ती   ठुकराने  लगे   |

        तन की  थकान, मन के  अवसाद से  निजात पाने लगे , 
             ह्रदय   का   जूनून ,    चाहत   में    बुनने   लगे  |

                चाहतों  के   दरमियाँ   दायरें  बनने  लगे  ,
            क्यों  घसीटें  मन  को,  इंसानियत  समझने  लगे   ?

            बच्चों   से  मोहब्बत,  प्रतियोगिता  भुलाने  लगे , 
             बनें  नेक   इंसान,   बाबूगिरी   ठुकराने   लगे  |

          खा  रहें  इस  नस्ल  को,  वो   कीड़े  दफ़नाने  लगे  ,
           कृत्रिमता  को  ठुकरा,   प्रकृति  को  अपनाने  लगे  |


                                - अनीता 

26 टिप्‍पणियां:

  1. सस्नेह आभार आदरणीय अनुराधा जी
    सादर

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (26-01-2019) को "गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-3228) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    गणतन्त्र दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. सह्रदय आभार आदरणीय चर्चा में स्थान देने के लिए
    सादर

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  4. हमेशा की तरह लाजबाब ,स्नेह सखी

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    1. प्रिय कामिनी जी - बहुत सा स्नेह सखी
      और तहे दिल से आभार आप का
      सादर

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  5. प्राकृति को अपनाने लगे ...
    सुंदर संदेश लिए हर शेर ... बहुत लाजवाब लेखन ...

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    1. आदरणीय दिगम्बर नास्वा जी आप का ब्लॉग पर तहे दिल से स्वागत है बहुत अच्छा लगा आप ब्लॉग पर पधारे .....उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए सह्रदय आभार आप का |
      सादर

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  6. उत्तर
    1. सह्रदय आभार आदरणीय लोकेश नदीश जी ...आप का ब्लॉग पर स्वागत है |
      सादर

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  7. each word has a true meaning and deep imapact.... Anita Ji behad sundar "shandar"

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  8. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    २८ जनवरी २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. सस्नेह आभार आदरणीय श्वेता जी हमक़दम में मुझे स्थान देने के लिए |
      सादर

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  9. बहुत सुन्दर अनीता जी,
    आशा, आत्म-विश्वास, कर्मठता और लोक-कल्याण की भावना, अवसाद को पास फटकने भी नहीं देंगे. फिर तो जो भी होगा - सुन्दर होगा, शिव होगा.

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    1. आदरणीय गोपेश जैस्वाल जी आप का ब्लॉग पर तहे दिल से स्वागत है बहुत दिनों बाद आप की प्रतिकिर्या मीली बहुत अच्छा लगा |सही कहा आप ने अवसाद का निवारण सकारात्मकता ही है |बहुत सुन्दर टिप्णी के लिए आप का सह्रदय आभार |
      सादर

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  10. तन की थकान और मन के अवसाद को मिटाना ही होगा
    कृत्रिमता को छोड़ प्रकृति को अपनाकर जिन्दगी के सत्य को स्वीकार करना होगा....
    बहुत ही लाजवाब... सकारात्मक भावों से भरी...
    वाह!!!

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    1. सस्नेह आभार आदरणीय सुधा जी -बहुत ही अच्छी टिप्णी ,मन को मोह गए आप के शब्द. ..
      आभार
      सादर

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  11. बहुत खूब........बेहतरीन सृजन आदरणीया

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    1. सह्रदय आभार आदरणीय रविन्द्र जी
      सादर

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,