गुरुवार, 17 मई 2018

दोहे... प्रथम प्रयास

दोहे... प्रथम प्रयास 

हारी दिल अपना सखी, कान्हा  तो चितचोर ।
सुनो बात प्रिय राधिका, मुझको अपना जान ।।

जब से देखा नैन भर, अर्पित तबसे प्राण ।
जपकर उसके नाम को, होती है नव भोर ।।

मीरा  दीवानी  कहे, छलिया अब नहि आय ।
लाज शर्म हारी सखी, अरि जग दिया बनाय ।।

दीवानी     मीरा    हुई,  जबसे देखा श्याम ।
घड़ी घड़ी जपने लगी,  राधे राधे नाम ।।
कान्हा कान्हा सब कहें, कान्हा तो चित चोर
दिल मे उसके राधिका,जगह जगह यह शोर   ।।

हुनर  तुम्हारा सादगी,नैना तीक्ष्ण कटार ।
देखा जबसे आपको,हुआ तभी से प्यार ।।

शब्द   प्यार  में  अल्प  है, गहरे  लेना भाव।
प्रेम मेरा स्वीकार हो, दिल पर करो न घाव 

नजरों   से    दूर   हो, भेजा    है  पैगाम
साजन  राह  निहारती, गोरी सुबह शाम

राह   निहारें  गोरङी,लेकर साजन नाम
कब  आओगें  पीवजी,हुई सुबह से शाम

बैरी   मन  लागे  नहीं,पिया  बसे  परदेश
जिवङो तरसे दिन रेन, नयनन जोए बाट

दर्पण देख गोरङी,फिर फिर कर सिंगार
रूठ  न  जावे पीवजी,सोचें यह हर  बार

पल पल राह निहारती,घङी घङी बैचैन।
साजन तेरी याद में,बरसे नित ही नैन।

हुनर  तुम्हारा सादगी, नैना तीक्ष्ण कटार ।
देखा जबसे आपको, हुआ तभी से प्यार ।।

दिल चाहे इक आपको, मन क्यों उड़ता जाय ।
देह   हुई   है   बाबरी, जगत दिया बिसराय ।।

अन धन  सब अर्जित रहे ,मिले  न एक पल चैन ।
त्राहि त्राहि  पुकार रहे  ,  मन  मानस  बैचैन ।

सजन बिन सिंगार झूठे, हिवड़े  री पूकार
  दिन महीने बरष  छूटे ,नैन करे तक़रार।

राम  तुम्हारा सच कहे  ,कण कण में है राम ।
सच की रहा चल  रहे ,सफल करे सब काम।।

मन  मेरे  कान्हा  बसे , तन में  बसे  राम ।
चैन ना हीं  बिन कान्हा, मिले राम आराम ।।

राम नाम स्मरण करे  , सफल  बने सब काम  ।
दू :ख दर्द हरण करे  ,  जन  मानस के राम ।।

राम  नाम  मृदु  रस भरा,राम हृदय सुख सार ।
वर्णन कब किससे हुआ,यह राम रमा संसार ।।

- अनीता सैनी 

3 टिप्‍पणियां:

Meena Bhardwaj ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (03-01-2020) को "शब्द ऊर्जा हैं " (35 69 ) पर भी होगी।

चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का

महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर

आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है

"मीना भारद्वाज"

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत सुंदर दोहे

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

अच्छा प्रयास किया है आपने दोहा रचने का।