मंगलवार, 22 जनवरी 2019

कोहरा



                   

           कोहरे  में  ठिठुरती  ज़िंदगी , मिला  अलाव  का सहारा ,
            कभी   ठंड   के   साये  में, कभी   धूप   ने  पुकारा |

         
               छिटका  द्वेष  का  कोहरा,  प्रीत   का  हुआ  सवेरा, 
           खिली   मुहब्बत   की   धूप,दर्द  का  मुस्कुराया    चेहरा | 

          
           ज़िंदगी   की  गर्दिश  ने, हर   चेहरे   का  रुप   निखारा,
          किसी  पर सजा  दिये आँसू , किसी  को  प्रीत  से  निखारा |


              उनकी   मुहब्बत    ने   तरासा   वजूद    हमारा  , 
         वो  तन्हाइयों   में  छोड़   गये,  हम  ने  महफ़िल  में  पुकारा |

         
           खिलखिलाती  धूप,  फूलों   की  ख़ुशबू , आसमां   हमारा, 
           कोहरे  ने  समेटी   ज़िंदगी, तड़पते  दिल  ने   पुकारा |

                                      - अनीता सैनी 

          

16 टिप्‍पणियां:

Chandrakant Patil ने कहा…

Well versed poem

रेणु ने कहा…

उनकी मोहब्बत ने तरासा वज़ूद हमारा ,
वो तन्हाइयों में छोड़ गए, हम ने महफ़िल में पुकारा ,
बहुत खूब प्रिय अनिता जी -- मौसम के कोहरे के बहाने मन का कोहरा भी साफ हो गया | हार्दिक शुभकामना के साथ बधाई |

अनीता सैनी ने कहा…

Thanks sir

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी रेणु जी सस्नेह आभार आप का उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
सादर आभार
आप को बहुत सा स्नेह |
सादर

मुकेश ने कहा…

उनकी मोहब्बत ने तरासा वज़ूद हमारा ,
वो तन्हाइयों में छोड़ गए, हम ने महफ़िल में पुकारा ,..बहुत ही सुन्दर रचना ।

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

खिलखिलाती धूप, फूलों की खुशबू , आसमां हमारा,
कोहरे ने समेटी जिंदगी, तड़पते दिल ने पुकारा।
सुन्दर रचना । बहुत-बहुत बधाई आदरणीय अनीता जी।

Rohitas ghorela ने कहा…

बहुत अच्छे.
वाह.

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय रोहिताश जी
आधार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय पुरुषोत्तम जी सह्रदय आभार आप का
उम्मीद है आप मार्गदर्शन करते रहेंगे
आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आप का आदरणीय
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

वाह बहुत सुंदर रचना 👌

अनीता सैनी ने कहा…

आभार सखी
सादर

RAKESH KUMAR SRIVASTAVA 'RAHI' ने कहा…

आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है. https://rakeshkirachanay.blogspot.com/2019/01/106.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय राकेश जी - सह्रदय आभार आप का मित्र मंडली में मुझे स्थान देने हेतु |
आभार
सादर

मुकेश सैनी ने कहा…

जिंदगी की गर्दिश ने, हर चहरे का रुप निखारा,
किसी पर सज़ा दिये आँसू , किसी को प्रीत से निखारा,

बहुत खूब।

अनीता सैनी ने कहा…

जी आभार
सादर