मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

वर्तमान हूँ मैं


शून्य नभ से झाँकते तारों की पीड़ा,
मूक स्मृतियों में सिसकता खंडहर हूँ मैं, 
हिंद-हृदय सजाता अश्रुमाला आज, 
आलोक जगत में धधकते प्राण,
चुप्पी साधे बिखरता वर्तमान हूँ मैं

कलुषित सौंदर्य,नहीं विचार सापेक्ष,
जटिलताओं में झूलता भावबोध हूँ मैं,
उत्थान की अभिलाषा अवनति की ग्लानि,
कल का अदृश्य वज्र मैं, मैं ज्वलित हूँ, 
एक पल ठहर प्रस्थान जलता वर्तमान हूँ मैं

अवसान की दुर्भावनाएँ व्याप्त अकर्मण्डयता, 
मृत्यु को प्राप्त मूल्य,क्षुद्रता ढोता अभिशाप मैं, 
अमरता का मान गढ़ने पुरुष मर्त्य बना आज, 
अनिमेष देखता अद्वैत लीन मैं,चिरध्यान में मैं, 
विमुख-उन्मुख तल्लीनता उठता वर्तमान हूँ मैं

©अनीता सैनी 

26 टिप्‍पणियां:

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

सुंदर रचना, ।।।।
चुप्पी साधे बिखेरता वर्तमान ।।।।
इस रचना का दर्शन विशाल है। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया अनीता जी।

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार सर उत्साह बढ़ाती सारगर्भित प्रतिक्रिया से और अपना विशाल विचार समेटे सुंदर व्याख्या से रचना का मान बढ़ाया है.
सादर

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 25 फरवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Kamini Sinha ने कहा…

अनिमेष देखता अद्वैत लीन मैं,चिरध्यान में मैं,
विमुख-उन्मुख तल्लीनता उठता वर्तमान हूँ मैं।

बेहद गहरे भाव समेटे लाजबाब सृजन अनीता जी ,सादर स्नेह आपको

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (26-02-2020) को    "डर लगता है"   (चर्चा अंक-3623)    पर भी होगी। 
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
 --
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

शुभा ने कहा…

वाह!प्रिय सखी अनीता ,अद्भुत !!

Anuradha chauhan ने कहा…

वाह बेहतरीन रचना सखी 👌

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

नमस्ते,

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 27 फरवरी 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!


anita _sudhir ने कहा…

अद्भुत सृजन अनिता जी

मन की वीणा ने कहा…

ज्वलंत वर्तमान का सदृश खाका उकेरती शानदार रचना! प्रतीक बहुत हृदय स्पर्शी ।
अभिनव सृजन।

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

हे भगवान !
ऐसे वर्त्तमान से भूत काल ही अच्छा था.

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी संध्या दैनिक में मेरी रचना को स्थान देने के लिये.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर मेरी रचना को स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार सखी सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय मेरी रचना को पांच लिंकों के आनंद पर स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

वर्तमान की विद्रूपताओं ने हमें भावशून्य होने में अहम भूमिका निभायी है। जीवन दर्शन के विभिन्न आयामों पर हमारा ध्यान केन्द्रित करती भाव-गाम्भीर्य से ओतप्रोत रचना।

बधाई एवं शुभकामनाएँ।

Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सुन्दर सारगर्भित समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत उम्दा

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर
सादर